पूर्वाभास पर आपका हार्दिक स्वागत है। 2012 में पूर्वाभास को मिशीगन-अमेरिका स्थित 'द थिंक क्लब' द्वारा 'बुक ऑफ़ द यीअर अवार्ड' प्रदान किया गया। 2014 में मेरे प्रथम नवगीत संग्रह 'टुकड़ा कागज का' को अभिव्यक्ति विश्वम् द्वारा 'नवांकुर पुरस्कार' एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा 'हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान' प्रदान किया गया। इस हेतु सुधी पाठकों और साथी रचनाकारों का ह्रदय से आभार।

कविता

अवनीश सिंह चौहान के नवगीत 

 

हे स्वरदेवी, स्वर दो! 

मेरी अनगढ़ वीणा को
हे स्वरदेवी, स्वर दो!

अंदर-बाहर घोर अँधेरा
भ्रम मन पर है डाले डेरा
दिशाहीन इस जीवन में
मातु उजाला भर दो!

मानवता की पढूँ ऋचाएं
जग-हित में तन-प्राण लगाएँ
एकनिष्ठ मन रहे सदा
माँ ऐसी मति कर दो!


जानें अपने को पहचानें
'सत्यम्‌ शिवम्‌ सुन्दरम्‌' मानें
कि जागृत हो प्रज्ञा मेरी
माँ इतना-सा वर दो!

प्रयास

मेरा प्रयास बन नदिया
जग में सदा बहूँ मैं

चल सकूँ उस राह पर भी
जो सूखकर पथरा गई हो
चट्‌टान को भी तोड  दूँ
जो रास्ते में आ गई हो

धीर धरे मन जोश भरे
अपनी राह गहूँ मैं

थके हुए हर प्यासे को
चलकर अपना मन दूँ, जल दूँ
टूटे-सूखे पौधें को
हरा-भरा नव-जीवन-दल दूँ

हर विपदा में, चिन्ता में
सबके साथ रहूँ मैं

आ खूब नहायें चिडियाँ-
बच्चे, माँझी नाव चलायें
ले जायें घर-क्यारी में
अपनी फसलों को नहलायें

आऊँ काम सभी के बस
प्रभु से यही कहूँ मैं

मन का तोता

मन का तोता बोला करता
रोज नये संवाद

महल-मलीदा-पदवी चाहे
लाखों-लाख पगार
काम एक ना वैसा करता
सपने आँख हजार

इच्छाओं की सूची भरता
देता सिर पर लाद

अपने आम बाग के मीठे
कुतर-कुतर कर फैंके
किन्तु पड़ोसी का खट्‌टा भी
उसको ज्यादा महके

समझाने पर करता-रहता
अड़ा-खड़ा प्रतिवाद

कि विज्ञापन की भाषा बोले
'यह दिल माँगे मोर'
देख-देख बौराये तोता
देता खींस निपोर

बात न मानो, करने लगता
घर में रोज फसाद

मरा आँख का पानी!

नयी चलन के इस कैफे में
शिथिल हुईं सब धाराएँ

पियें-पिलायें, मौज उड़ायें
मिल ठनठनायें मनचले
देह उघारे, करें इशारे
जुड़ें-जुड़ायें नयन-गले

मदहोशी में इतना बहके
भूल गये सब सीमाएँ!

झरी माथ से मादक बूँदें
साँसों में कुछ ताप चढ़ा
हौले-हौले अंदर-बाहर
कामुकता का चाप चढ़ा

इक दूजे में इतना डूबे
टूटीं सब मर्यादाएँ!

भइया मेरे, साधो मन को
अजब-गजब-सी यह धरती
थोड़ा पानी रखो बचाकर
करते क्यों आँखें परती?

जब-जब मरा आँख का पानी
आयीं तब-तब विपदाएँ!



अवनीश सिंह चौहान


जन्म: 4 जून, 1979, चन्दपुरा (निहाल सिंह), इटावा (उत्तर प्रदेश) में
पिता का नाम: श्री प्रहलाद सिंह चौहान
माताका नाम: श्रीमती उमा चौहान
शिक्षा: अंग्रेज़ी में एम०ए०, एम०फिल० एवं पीएच०डी० (शोधरत्) और बी०एड०
प्रकाशन: अमर उजाला, देशधर्म, डी एल ए, उत्तर केसरी, प्रेस-मेन, नये-पुराने, गोलकोण्डा दर्पण, संकल्प रथ, अभिनव प्रसंगवश, साहित्यायन, युग हलचल, यदि, साहित्य दर्पण, परमार्थ, आनंदरेखा, आनंदयुग, कविता कोश डॉट कॉम, सृजनगाथा  डॉट कॉम, अनुभूति डाट काम, हिन्द-युग्म डॉट कॉम, रचनाकार, साहित्य शिल्पी, पी4पोएट्री डॉट कॉम, पोयमहण्टर डॉट कॉम, पोएटफ्रीक डॉट कॉम, पोयम्सएबाउट डॉट कॉम, आदि हिन्दी व अंग्रेजी के पत्र-पत्रिकाओं में आलेख, समीक्षाएँ, साक्षात्कार, कहानियाँ, कविताओं एवं नवगीतों का निरंतर प्रकाशन। साप्ताहिक पत्र ‘प्रेस मेन’, भोपाल, म०प्र० के ‘युवा गीतकार अंक’ (30 मई, 2009) तथा ‘मुरादाबाद के प्रतिनिधि रचनाकार’ (2010) में गीत संकलित मेरी शाइन (आयरलेंड) द्वारा सम्पादित अंग्रेजी कविता संग्रह 'स्ट्रिंग ऑफ वर्ड्स' में रचनाएँ संकलित
प्रकाशित कृतियाँ: स्वामी विवेकानन्द: सिलेक्ट स्पीचेज, किंग लियर: ए क्रिटिकल स्टडी, स्पीचेज आफ स्वामी विवेकानन्द एण्ड सुभाषचन्द्र बोस: ए कॅम्परेटिव स्टडी, ए क्विन्टेसेन्स आफ इंग्लिश प्रोज (को-आथर), साइलेंस द कोर्ट इज इन सेशन: ए क्रिटिकल स्टडी (को-आथर), फंक्शनल स्किल्स इन लैंग्वेज एण्ड लिट्रेचर, ए पैसेज टु इण्डिया: ए क्रिटिकल स्टडी (को-आथर)
अप्रकाशित कृतियाँ: एक नवगीत संग्रह, एक कहानी संग्रह तथा एक गीत, कविता और कहानी से संदर्भित समीक्षकीय आलेखों का संग्रह आदि
अनुवाद:अंग्रेजी के महान नाटककार विलियम शेक्सपियर द्वारा विरचित दुखान्त नाटक ‘किंग लियर’ का हिन्दी अनुवाद भवदीय प्रकाशन, अयोध्या से प्रकाशित ।
संपादन:
प्रख्यात गीतकार, आलोचक, संपादक श्री दिनेश सिंहजी (रायबरेली, उ०प्र०) की चर्चित एवं स्थापित कविता-पत्रिका ‘नये-पुराने’ (अनियतकालिक) के कार्यकारी संपादक पद पर अवैतनिक कार्यरत।
प्रबुद्ध गीतकार डॉ०बुद्धिनाथ मिश्र (देहरादून) की रचनाधर्मिता पर आधारित उक्त पत्रिका का आगामी अंक शीघ्र ही प्रकाश्य। वेब पत्रिका ‘गीत-पहल’ के समन्वयक एवं सम्पादक ।

सह-संपादन: कवि ब्रजभूषण सिंह गौतम ‘अनुराग’ अभिनंदन ग्रंथ (2009) के सह-संपादक ।
संपादन मण्डल: प्रवासी साहित्यकार सुरेशचन्द्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ (नॉर्वे) अभिनंदन ग्रंथ (2009) के सम्पादक मण्डल के सदस्य ।
सम्मान :
अखिल भारतीय साहित्य कला मंच, मुरादाबाद (उ०प्र०) से ब्रजेश शुक्ल स्मृति साहित्य साधक सम्मान, वर्ष 2009
हिंदी साहित्य मर्मज्ञ सम्मान, मुरादाबाद, उ.प्र., 2010
संप्रति:
प्राध्यापक (अंग्रेज़ी), तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद, उ.प्र
स्थायी पता: ग्राम व पो.- चन्दपुरा (निहाल सिंह), जनपद-इटावा (उ.प्र.)-२०६१२७, भारत । 
मोबा० व ई-मेल: 09456011560, abnishsinghchauhan@gmail.com
  
Web Info: www.printsasia.com/BookDetails.aspx?Id=882727714
www.marelibri.com/topic/39-main/books/AUTHOR_AZ/2200
bhavdiya.com/book_detail.php?cat_id=english&&id=161   www.dkagencies.com/doc/from/1023/.../MicroSubjectDetails.html
www.poemhunter.com/abnish-singh-chauhan/
www.poemsabout.com/poet/abnish-singh-chauhan/
http://www.completeclassics.com/p/m/poem.asp?poem=22816623&poet=1036823&num=4&total=6
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