पूर्वाभास पर आपका हार्दिक स्वागत है। 2012 में पूर्वाभास को मिशीगन-अमेरिका स्थित 'द थिंक क्लब' द्वारा 'बुक ऑफ़ द यीअर अवार्ड' प्रदान किया गया। 2014 में मेरे प्रथम नवगीत संग्रह 'टुकड़ा कागज का' को अभिव्यक्ति विश्वम् द्वारा 'नवांकुर पुरस्कार' एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा 'हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान' प्रदान किया गया। इस हेतु सुधी पाठकों और साथी रचनाकारों का ह्रदय से आभार।

रविवार, 28 फ़रवरी 2016

राजेंद्र वर्मा के बीस हाइकु

राजेंद्र वर्मा 


चर्चित रचनाकर श्री राजेन्द्र वर्मा का जन्म 1955 के मार्च माह में बाराबंकी, उ.प्र. में हुआ। प्रकाशित कृतियाँ : चुटकी भर चाँदनी (दोहे,1998), नवसृजन के स्वर (गीत,1998), मुझे ईमानदार मत कहो (व्यंग्य-निबंध,1999), अन्तर सन्धि (गीत-नवगीत, 2001), अभिमन्यु की जीत (लघुकथाएँ, 2001), बूँद-बूँद बादल (हाइकु, 2005), लौ (ग़ज़लें, 2006), दोहा छन्दः एक अध्ययन (आलोचना, 2009), मिथ्या का सत्य (मुक्तछंद कविताएँ, 2010), औलाद का सुख (साक्षरों हेतु कहानियाँ, 2011), दीया और दीवट (निबन्ध, 2012), सफलता के सात सोपान (प्रेरक साहित्य, 2013), भारत उसका नाम (किशोरोपयोगी काव्य, 2014), विकल्प (लघुकथाएँ, 2014), पद पुराण (व्यंग्य-निबंध, 2015), कागज़ की नाव (नवगीत, 2015)। पुरस्कार/सम्मान: उ.प्र. हिंदी संस्थान द्वारा ‘मुझे ईमानदार मत कहो’ पर श्रीनारायण चतुर्वेदी व्यंग्य-नामित पुरस्कार (1999) तथा ‘दीया और दीवट’ पर महावीर प्रसाद द्विवेदी निबंध-नामित पुरस्कार (2012) सहित देश की कई अन्य संस्थाओं द्वारा सम्मानित।मूल्यांकन : लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा रचनाकार की साहित्यिक साधना पर एम्.फिल. संपन्न। अनुवाद : कुछ लघुकथाओं और गजलों का पंजाबी में अनुवाद। संपर्क: 3/29 विकास नगर, लखनऊ 226 022, मो. 80096 60096। ई-मेल : rajendrapverma@gmail.com

चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार 
१. पौ फट रही-
उठ बैठा बच्चा
आँखे मलता

२. खिले कमल-
खिलखिलाने लगे
उदास बच्चे

३. पूनों की रात-
तैर रहा चन्द्रमा
डल झील में

४. अमा की रात-
दिप-दिप करते
आये खद्योत!

५. छा रहे मेघ-
खोल रहा मयूर
अपने पंख

६. पहली बूँद-
माटी से आने लगी
सोंधी महक

७. मेघ झरते-
बज रहा सितार
एक लय में

८. धान रोपती
गा रहीं महिलाएँ-
बच्चे पीठ पे

९. शरत्पूर्णिमा-
खिल रहा कुमुद
शांत सर में

१०. गिरते ओले
टीन की छत पर-
ताशे की ध्वनि

१२. माघ नहान-
लहडू पे सवार
गा रहीं स्त्रियाँ

१३. डार से टूटी-
नर्तन कर रही
हवा में पत्ती

१४. पवन लाया
वसंत का मेसेज,
मन भांगड़ा!

१५. रसाल पके-
कूक रही कोयल
बच्चे इकट्ठे!

१६. झपकी आती-
गिर-गिर पड़ता
हाथ का पंखा

१७. शुभ विवाह-
बुआजी लगा रहीं
हल्दी की छापी

१८. आँचल हटा-
स्तन से लगा शिशु
मुस्कुरा उठा

१९. मेस का खाना-
माँ के हाथ की रोटी
याद आ गयी

२०. सफ़ेद बाल
कनपटी के पास-
पहली घंटी

Twenty Haiku (Hindi) of Rajendra Verma

3 टिप्‍पणियां:

  1. अत्यंत ही सार्थक रचना आदरणीय । जीवंत बिम्ब ।

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  2. अत्यंत ही सार्थक रचना आदरणीय । जीवंत बिम्ब ।

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  3. बेहतरीन अभिव्यक्ति.....बहुत बहुत बधाई.....

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