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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

दो कविताएँ: कवियत्री- नीरा सिह

नीरा सिह

जन्म स्थान: गोरखपुर , उ.प्र.
शिक्षा: रसायन विज्ञान में परास्नातक, बी .एड.
प्रकाशन: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित
कृतियाँ: दो विज्ञान की किताबों का प्रकाशन
सम्प्रति: एक केन्द्रीय विद्यालय में अध्यापन, दिल्ली
संपर्क: neera.ashu@ymail.com

1. बीते पल 
चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार

उस रात देर तलक मैं जागती रही
और रही सुनती रात की ख़ामोशी
और तभी किया महसूस
निःशब्द आवाजों को
अपने इर्द-गिर्द
अपने अतीत में

कोई मुझे पुकार रहा है
मेरे बचपन में
और कोई किशोरावस्था के
उस पल में
जहाँ शिल्पकार गढ़ रहा है
मेरा तन-मन

आज एक अरसे बाद
ऐसा लग रहा है
मैं अकेली नही इस ब्रहमांड में
एक महफ़िल सजी है
आसमान में
चन्द्रमा, तारे, आकाशगंगा
और धरती पर हैं
हम सब

2. चाहत

चाहत 
चाँद को पाने की
खुले-नीले आसमान में उड़ने की
चाहत रात की रानी को छूने की
और सावन की बारिश में
भीग जाने की

चाहत
गर्मी की धूप में
पेड़ की छांव में सुस्ताने की
चांदनी रात में
समुंदर के किनारे घूमने की
ओस जड़ित घास पर चलने की
और चाहत भीड़ में
एकांत की

वक्त कम 
और चाहतें 
असीम
कुछ पूरी हुईं
कुछ रह गईं
जहाँ अधूरी चाहतें
वक्त के साथ पीछे जा रही है 
वहीं वर्तमान
अपनी रफ़्तार से भाग रहा है

Two poems of Neera Singh

2 टिप्‍पणियां:

  1. NEERA SINGH KI DONON KAVITAYEN BHOGE HUE YATHRTHA SE SAKSHATKAR KARATI HAIN AUR HRIDAY SE UPAJI SWABHAVIK ANTARDWANI SE LAGTI HAI.BADHAI NEERA

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