पूर्वाभास पर आपका हार्दिक स्वागत है। 2012 में पूर्वाभास को मिशीगन-अमेरिका स्थित 'द थिंक क्लब' द्वारा 'बुक ऑफ़ द यीअर अवार्ड' प्रदान किया गया। 2014 में मेरे प्रथम नवगीत संग्रह 'टुकड़ा कागज का' को अभिव्यक्ति विश्वम् द्वारा 'नवांकुर पुरस्कार' एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा 'हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान' प्रदान किया गया। इस हेतु सुधी पाठकों और साथी रचनाकारों का ह्रदय से आभार।

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

पांच लघु कविताएँ: कवि- परमेश्वर फूंकवाल

परमेश्वर फूंकवाल

जन्म: १६ अगस्त, नीमच (म प्र) में
शिक्षा: सिविल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर
सम्प्रति: अनुसन्धान, अभिकल्प एवं मानक संगठन,
 रेल मंत्रालय, लखनऊ में कार्यकारी निदेशक
रूचि: साहित्य, अध्यात्म और अनुसन्धान, 
१० से अधिक तकनीकी शोध पत्र प्रकाशित

चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार

1. बेंच

तुम्हारी याद
प्रतीक्षा में होगी
पार्क की उस बेंच पर  
मेरी रूह को कसने को आकुल
जैसे मेरी बाहें होती थीं कल
तुम्हारे अस्तित्व को घेरे
उस तक जाऊंगा तो
अकेला नहीं लौटूंगा

2. पगडंडी

लेक पार्क की घुमावदार पगडंडी
दो जोड़े पांवों के चिन्हों से
बतियाती अक्सर
यादों के झुरमुट में
खो जाती है
सम्हाल कर रखी है
उसने अब तक तुम्हारी हंसी
अपने किनारे उगे उस
अनाम फूल में

3. फूल

फूल अनमने हैं
रंगों में अपने आप को छुपाये
वो आइना
गूम है
अपना अक्स देखकर
जिसमें
अपने खिलने के मायने
मिल जाते थे उन्हें

4. चाँद

चाँद रात भर
सोया रहा सर्द झील में
लेता हुआ करवटें
इस पार से उस पार
रात की पलकें
अंतिम बार गिर कर
उठने का होंसला खो बैठीं
स्वप्न जलपरी को खोजते
मरू के किसी
वीरान दिन से
भग्न हो रहे


5. समय

समय दस्तक देकर
छुप गया कंटीली ओट
द्वार खोले तो
वसंत की जगह
खाली हाथ
हवा मिली

16 टिप्‍पणियां:

  1. सभी लघु कविताएँ बहुत सुन्दर .....कल्पनाओं की ऊंचाई को सुन्दर शब्दों से बांधा है आपने ....बढ़ा परमेश्वर फुन्क्वाल जी

    उत्तर देंहटाएं
  2. सभी लघु कवितायें बहुत सुन्दर हैं ...शब्दों की ऊंचाइयों को सुन्दर शब्दों मे बांधा है आपने ...बधाई परमेश्वर फुंकवाल जी

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. परमेश्वर फुंकवाल18 फ़रवरी 2012 को 9:12 am

      आ संध्या जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद, सुन्दर शब्दों में सराहना के लिए

      हटाएं
  3. परमेश्वर फुंकवाल16 फ़रवरी 2012 को 9:16 pm

    संध्या जी आपकी सराहना आगे बढ़ने का होंसला देती है. हार्दिक धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. परमेश्वर फुंकवाल17 फ़रवरी 2012 को 9:54 pm

      आपका बहुत बहुत धन्यवाद डा रूपचन्द्र शास्त्री जी.

      हटाएं
  5. अनुपम भाव संयोजन के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. परमेश्वर फुंकवाल17 फ़रवरी 2012 को 9:54 pm

      आपका आभार शांति गर्ग जी.

      हटाएं
  6. sunder bhavon ko sunder bimbon se sajaya hai .bahut sunder
    rachana

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. परमेश्वर फुंकवाल17 फ़रवरी 2012 को 9:56 pm

      आपका आभार रचना जी सुन्दर प्रतिक्रिया से उत्साह बढ़ाने के लिए.

      हटाएं
    2. परमेश्वर फुंकवाल18 फ़रवरी 2012 को 9:11 am

      रचना जी आपका हार्दिक धन्यवाद उत्साह बढ़ाने के लिए

      हटाएं
    3. परमेश्वर फुँकवाल23 फ़रवरी 2012 को 4:28 pm

      रचना जी, पता नहीं क्यों उत्तर पोस्ट नहीं हो पा रहा है. पुनः प्रयास कर रहा हूँ. "आपका आभार सराहना युक्त प्रतिक्रिया के लिए".

      हटाएं
  7. चाँद रात भर
    सोया रहा सर्द झील में
    लेता हुआ करवटें
    इस पार से उस पार
    रात की पलकें
    अंतिम बार गिर कर
    उठने का होंसला खो बैठीं

    वाह ! वाह! वाह !
    वसंत सचमुच दस्तक देकर लौट गया । पर उसे तो आना ही होगा ।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. परमेश्वर फुंकवाल23 फ़रवरी 2012 को 4:24 pm

      आशा जी, पंक्तियाँ रेखांकित कर कविताओं के मर्म तक जाने के लिए एवं सराहना के लिए विनीत हूँ. धन्यवाद.

      हटाएं
  8. थोड़े से शब्दों नॆं कितनी गहराई तय की है इसका अनुमान आसानी से लगा
    पाना सम्भव नहीं है।ये एक कुशल शिल्पी की कलम का कमाल है और थोड़ा-थोड़ा गागर में सागर की अनुभुति कराता हैं,जहाँ तक मैं समझ पा रहा हूँ ये 
    कवितायें नवछायावाद की धार को और पैना कर रही हैं।
    इतनी अच्छी कविताओं के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यबाद।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. परमेश्वर फुंकवाल5 अप्रैल 2012 को 3:03 pm

      आ अनिल जी. आपकी सहृदय प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से धन्यवाद.

      हटाएं

आपकी प्रतिक्रियाएँ हमारा संबल: