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मंगलवार, 16 अक्तूबर 2012

अखिल भारतीय साहित्य कला मंच: साहित्यकार सम्मान समारोह- 2012


मुरादाबाद: 14 अक्टूबर, 2012; अखिल भारतीय साहित्य कला मंच, उ.प्र. (भारत) द्वारा आयोजित साहित्य समारोह में मंच द्वारा हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में विविध उपलब्धियों के लिए तीस विभूतियों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का समारम्भ मुख्य अतिथि डॉ. दीनानाथ सिंह (मुंगेर), कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रख्यात हिन्दी सेवी डॉ. राम अवतार शर्मा, (आगरा), विशिष्ट अतिथि डॉ. तंकमणि अम्मा, (केरल); डॉ. निजामुद्दीन (जम्मू व कश्मीर) और डॉ. अंजना संधीर, (अहमदाबाद) द्वारा सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन करने के साथ हुआ। तत्पश्चात सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की।

मंच के संरक्षक श्री लक्ष्मण प्रसाद अग्रवाल (मुरादाबाद), श्री राजकुमार अग्रवाल और श्री मनोज कुमार अग्रवाल (चाँदपुर) ने मुख्य अतिथि, कार्यक्रम अध्यक्ष, और विशिष्ट अतिथियों को बैज लगाकर एवं माल्यार्पण करके स्वागत किया। स्वागत भाषण श्री मनोज कुमार अग्रवाल, संरक्षक-मंच ने प्रस्तुत किया। 

कार्यक्रम के प्रारम्भ में कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. रामअवतार शर्मा (आगरा), और मुख्य अतिथि डॉ. दीनानाथ सिंह, द्वारा डॉ कमलेश, की शोधकृति 'रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के हिन्दी प्राध्यापकों का हिन्दी को योगदान', डॉ. जयति देवी की शोधकृति 'शमशेर की साहित्य साधना' और डॉ. शीनुल इस्लाम मलिक की शोध-कृति- ‘कालिदास के नाटकों में पर्यावरण चेतना’ तथा डॉ. महेश ‘दिवाकर’, डॉ. रामगोपाल भारतीय और डॉ. मीना कौल द्वारा सम्पादित ‘उत्तर प्रदेश के साहित्यकार- भाग-2’, डॉ. महेश ‘दिवाकर’, डॉ. मीना कौल तथा डॉ. अभय कुमार द्वारा लिखित ‘हिन्दी गीत काव्य के विविध सोपान’, डॉ. मंजू चैहान की शोधकृति ‘गोपालदास ‘नीरज’ के काव्य में जीवन मूल्य’ और डॉ. महेश ‘दिवाकर’ और डॉ.मीना कौल द्वारा सम्पादित ‘भ्रष्टाचार के विरूद्ध’ का लोकार्पण किया गया। 

तत्पश्चात् साहित्य सृजन हेतु डॉ. तंकमणि अम्मा, तिरूअनंतपुरम्; डॉ. अमरनाथ, कोलकाता; डॉ. जी. पद्मजा देवी, तिरूपति; डॉ. सुरेश माहेश्वरी, अमलनेर; डॉ. सुरपनेनि शेषारत्नम्, विशाखापट्टनम; श्री मुरलीधर पाण्डेय, मुम्बई; डॉ. सी.मणिकन्ठम्, चेन्नै; डॉ. सूर्यदीन यादव, नाडियाड़; डॉ. रामअवतार शर्मा, आगरा; डॉ. दीनानाथ सिंह, मुंगेर; डॉ. निजामुद्दीन, श्रीनगर; डॉ. एम. रंगैय्या, सिकन्दराबाद; डॉ. देवेनचन्द्रदास ‘सुदामा’, गुवाहाटी; डॉ. बी. पी. फिलिप, कोहिमा; डॉ. अंजना संधीर, अहमदाबाद; डॉ. रीता सिंह, कुल्लू; डॉ. आलोक कुमार रस्तोगी, दिल्ली; डॉ. संदीप अवस्थी, अजमेर; डॉ. अमृतलाल मदान, कैथल; श्री अशोक सिंघई, भिलाईनगर; डॉ. बीना बुदकी, गाजियाबाद; श्री आद्याप्रसाद सिंह ‘प्रदीप’, सुल्तानपुर; श्री मनोज कुमार ‘मनोज’, मेरठ; श्री वीरेन्द्र ‘आस्तिक’, कानपुर; श्री जगदीशप्रसाद बरनवाल, आज़मगढ़; श्री सुनील कुमार शर्मा, मुरादाबाद; डॉ. रामेश्वरप्रसाद गुप्त, दतिया; श्री शचीन्द्र भटनागर, मुरादाबाद; श्री ज्ञानस्वरूप सक्सैना ‘कुमुद’, बरेली; श्री मनोज ‘अबोध’, बिजनौर; और श्री रूपनारायण सोनकर, मसूरी को मंच की ओर से विविध सम्मानों से सम्मानित /पुरस्कृत किया गया। उन्हें शाल, प्रतीक चिन्ह, सम्मान पत्र और नकद राशि भेंट की गयी।













इसी अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. रामअवतार शर्मा ने ‘भारतीय संसद और हिन्दी की भूमिका’ पर बोलते हुए कहा कि आजादी के बाद से ही भारतीय लोकसेवकों की राजनीतिक अदूरदर्शिता के कारण हिन्दी निरन्तर उपेक्षित हो रही है। उन्होंने साहित्यकारों का आह्नान किया कि वे सरकार की हिन्दी विरोधी नीतियों का खुलकर विरोध करें। मुख्य अतिथि डॉ. दीनानाथ सिंह ने ‘हिन्दी की दशा एवं दिशा’ पर अपना वक्तव्य देते हुए हिन्दी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और दक्षिण के साहित्यकारों की उपेक्षा की ओर भी इंगित किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. तंकमणि अम्मा, ने भी साहित्य के महत्व और साहित्यकार के दायित्व को उद्घाटित किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. अंजना संधीर ने वैश्विक एकता में हिन्दी साहित्य की महत्ता और साहित्यकार के दायित्व पर प्रकाश डाला और विशिष्ट अतिथि डॉ. निजामुद्दीन ने जम्मू एवं कश्मीर में हिन्दी की दशा एवं दिशा पर प्रकाश डाला। कानपूर से पधारे वीरेंद्र आस्तिक ने कहा- 'प्रतिवर्ष हिन्दी पखवाड़ा मनाया जाता है जोकि अब एक कर्मकांड में बदल चुका है। क्योंकि उस दिन हम जो भी संकल्प लेते है उसे दूसरे दिन ही भूल जाते हैं। अब हिन्दी दिवस पर न कोई विशेष सक्रियता दिखाई पड़ती है और न ही उसके प्रति कोई प्रतिबद्धता या जवाबदेही। योजनाएँ सिर्फ कागज़ तक ही सीमित रह जाती हैं।' डॉ. अमरनाथ (कोलकाता) ने कहा- ' हिन्दी विकीपीडिया पर चौथे स्थान पर है और यदि भारत की सभी बोलियों को हिन्दी के साथ जोड़कर देखा जाये तो यह विश्व में प्रथम स्थान प्राप्त कर लेगी। डॉ. रीता सिंह ने कहा- 'हिन्दी हम सब की भाषा है और इसके उत्थान के लिए हम सभी को प्रयास करने होंगे। इस अवसर पर सम्मानित साहित्यकारों ने संस्कृति एवं साहित्य के संवर्धन में साहित्यकारों की भूमिका को बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ अम्बरीष कुमार गर्ग एवं विवेक निर्मल ने संयुक्त रूप में किया। आभार संस्थापक अध्यक्ष- डॉ. महेश ‘दिवाकर’ ने किया। 

समारोह में इस अवसर पर अनेक प्रान्तों के साहित्यकार मौजूद थे। प्रो. रामप्रकाश गोयल (बरेली); डॉ. परमेश्वर गोयल (पूर्णिया); डॉ. प्रभा कपूर, डॉ. पी. के. शुक्ल, डॉ. विनोद कुमार पाण्डेय (मुरादाबाद); डॉ शमा परवीन; डॉ. मनीषा मित्तल; डॉ. अरूण रानी (चाँदपुर); रवीन्द्र मोहन ‘अनगढ़’; रामप्रकाश ‘ओज’, डॉ. मीना कौल (मुरादाबाद); डॉ. दिनेश चमोला (देहरादून), डॉ. ऋजु पंवार (मेरठ); रमेश सोबती (फगवाड़ा);डॉ. विनोद कुमार ‘प्रसून’ (नोयडा); डॉ. सुनील अग्रवाल (चन्दौसी); डॉ. रघुवीरशरण शर्मा (रामपुर); अनिल शर्मा ‘अनिल’ (धामपुर); सत्यपाल सत्यम, समीर मण्डल, डॉ. सुधाकर ‘आशावादी’, सुमनेश ‘सुमन’, कौशल कुमार, श्री अनिल सिसौदिया, (मेरठ); डॉ. आर.सी.शुक्ला, डॉ. दीपक बुदकी, डॉ. गंगेश गुंजन, अशोक ज्योति (नई दिल्ली), डॉ. नीरू कपूर, डॉ. राजीव शर्मा, डॉ. चन्द्रभान सिंह यादव, डॉ. मुकेश कुमार गुप्ता, पुष्पेन्द्र वर्णवाल, माहेश्वर तिवारी, ब्रजभूषण सिंह गौतम ‘अनुराग’, डॉ. मयंक पंवार, डॉ. अभय कुमार, डॉ. स्वाति पंवार, डॉ. अनुराधा पंवार, महेश पाल सिंह राघव, योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई, रामलाल ‘अन्जाना’, वीरेन्द्र ‘बृजवासी’, अशोक विश्नोई, मीना नकवी, राजीव सक्सेना, ओंकार सिंह ओंकार, आनन्द गौरव, कृष्ण कुमार नाज़, चन्द्रशेखर ‘मयूर’, सतीश फ़िगार, श्री योगेन्द्र ‘व्योम’, जिया जमीर, ओमराज, श्री अतुल जौहरी, श्री शिवशंकर यजुर्वेदी, फक्कड़ मुरादाबादी, विवेक ‘निर्मल’, जितेन्द्र जौली, अवनीश सिंह चैहान आदि साहित्यकार उपस्थित थे। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में स्थानीय और बाहर से आये साहित्यकारों की कविगोष्ठी भी आयोजित की गयी। आभार अभिव्यक्ति संस्था के संस्थापक-अध्यक्ष, कर्मयोगी-साहित्यकार डॉ. महेश दिवाकर जी ने की। 
प्रस्तुति: 
अखिल भारतीय साहित्य कला मंच
मुरादाबाद, उ.प्र.

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