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गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

काशी मरणान्मुक्ति: साहित्य, संस्कृति, धर्म, दर्शन तथा अध्यात्म का अद्भुत समन्वय- प्रो. एस. पी. दुबे



[काशी मरणान्मुक्ति, लेखक: मनोज ठक्कर एवं रश्मि छाजेड, संस्करण: तृतीय 2011, प्रकाशक: शिव ॐ साईं प्रकाशन, 95/3, वल्लभ नगर, इंदौर- 452003. ISBN: 978-81-910927-2-1]

काशी मरणान्मुक्ति, जिसके लेखक द्वय मनोज ठक्कर एवं रश्मि छाजेड हैं, 21 वीं शताब्दी का हिन्दी का श्रेष्ठ प्रकाशन माना जाना चाहिए। इसमें साहित्य, संस्कृति, धर्म, दर्शन तथा अध्यात्म का ऐसा समन्वय है जो अद्भुत है। शैव तथा वैशनव परम्पराओं का ऐसा सामासिक स्वरुप बिरला ही मिलता है।  काशी के माध्यम से पूरे भारतीय धर्मस्थलों का इस प्रकार से पाठक भ्रमण करता है कि उसकी बार-बार केंद्र से परिधि और परिधि से केंद्र की मानसिक यात्रा सहज हो जाती है। कबीर, तुलसी, रामकृष्ण परमहंस, साईं बाबा एवं तेलंग स्वामी के सहज आशीर्वाद का प्रसाद नायक को प्राप्त होता है और उसके माध्यम से कहानी के सभी सहयोगी और पाठक भी प्राप्त करते हैं। पूरे ग्रन्थ में भाषा एवं टंकण की त्रुटि लगभग नगण्य है। इस प्रकार के ग्रन्थ के प्रकाशन के लिए लेखक द्वय को अनेकशः साधुवाद।

प्रो. एस. पी. दुबे
दर्शन, डुप्लेक्स-09,
अप्सरा अपार्टमेंट्स
6/15-33, साउथ सिविल लाइंस
जबलपुर- 482001 (म.प्र.)
ई-मेल: sp_dubey@rediffmail.com

Kashi Marananmukti by Manoj Thakkar and Rashmi Chhajed

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