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मंगलवार, 18 फ़रवरी 2014

'यदि' पत्रिका का 'दिनेश सिंह स्मृति विशेषांक' लोकार्पित

ओम प्रकाश सिंह, रमाकांत, ओमप्रकाश चौबे (ओम धीरज), अवनीश सिंह चौहान,
शीतलदीन अवस्थी, आनन्द स्वरूप श्रीवास्तव एवं रामनारायण रमण
(बाएं से दाएँ) 'दिनेश सिंह स्मृति विशेषांक' का लोकार्पण करते हुए

रायबरेली : रविवार 16 फरवरी 2013 : साहित्यिक पत्रिका ‘यदि‘ के तत्त्वावधान में सुप्रसिद्ध गीतकवि एवं सम्पादक दिनेश सिंह के व्यक्तित्व और कृतित्व पर एक वृहद परिचर्चा गोष्ठी का आयोजन और 'दिनेश सिंह स्मृति विशेषांक' का लोकार्पण लेखपाल संघ सभागार में किया गया। 

कार्यक्रम के प्रारम्भ में जनपद अमेठी से पधारे वीरेश प्रताप सिंह ने दिनेश सिंह जी के प्रतिनिधि गीतों का सस्वर पाठ किया। उनके दादी माँ गीत के सस्वर पाठ से दिनेश सिंह की स्मृतियाँ ताजा हो गयीं।
दिनेश सिंह (1947-2012)

दादी माँ के छोटे-छोटे पांव
रास्ते छोटे छोटे। 

जीवन उतना जितने रिश्ते
सांसें उतनी जितने बोल 
उतनी प्यास कि जितना पानी
दुःख उतना जितना भूगोल
संझा तुलसी चौरा टपके आँख
दिवस का दर्द कचोटे।

कोहबर की यादें गठियाये
आँचल में मुरझाये फूल 
इतिहासों के पन्नों पर
करलीं सारी गलतियां क़ुबूल
हतप्रभ तकती चाल समय की 
और चलन के सिक्के खोटे। 

थे पहाड़ से पिता हमारे
पुरखे थे पेड़ों की छाँव 
बर्फ और पत्तों के नीचे
बसा हुआ था सारा गाँव 
भूख-प्यास में देह गलाते
अंग जलाते कसे लंगोटे

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इण्टर कालेज महराजगंज के पूर्व प्रधानाचार्य शीतलदीन अवस्थी ने दिनेश सिंह के बालकाल और युवावस्था की स्मृतियों एवं साहित्यिक गतिविधियों और 'नए-पुराने' पत्रिका का नामकरण करने सम्बन्धी अपने अनुभवों को प्रस्तुत किया। यदि पत्रिका के युवा सम्पादक रमाकांत को 'दिनेश सिंह स्मृति विशेषांक' का सम्पादन करने पर बधाई देते हुए अबनीश सिंह चैहान ने दिनेश सिंह को अपनी धुन का पक्का और गीतों के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित व्यक्तित्व बताया, जिसका नोटिस नामवर सिंह, प्रभाकर श्रोत्रिय और अखिलेश जैसे नयी कविता और कहानी के समर्थकों और विद्वानों ने भी लिया। उन्होंने दिनेश सिंह के साथ गुज़ारे गये अपने यादगार पलों को भी साझा किया। ओम धीरज ने दिनेश सिंह द्वारा सम्पादित गीत की प्रतिष्ठित पत्रिका 'नये-पुराने' के सम्पादकीय लेखों को ऐतिहासिक दस्तावेज़ बताते हुए इन्हें पुस्तकाकार रूप में संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने कहा कि दिनेश जी कविता और गीत के अंतर्भेदी रिश्तों को स्वीकार करते थे। ओम प्रकाश सिंह ने दिनेश सिंह की गीत दृष्टि पर विस्तृत प्रकाश डाला और उन्हें हमारे समय का अत्यन्त महत्वपूर्ण गीतकार बताया। 

वक्तव्य देते रमाकांत और मंच पर ओम धीरज,
अवनीश सिंह चौहान आदि 
रामनारायण ‘रमण‘ ने दिनेश सिंह की तुलना महाप्राण निराला के व्यक्तित्व से की और उन्हें निराला की परम्परा का व्यक्ति एवं कवि बताया। विनय भदौरिया ने कहा कि गीत को पुनः स्थापित करने और चर्चा के केंद्र में लाने का सार्थक प्रयास जिन रचनाकारों ने किया है उनमें डॉ शम्भुनाथ सिंह के बाद दिनेश सिंह का नाम बड़े आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। आनन्द स्वरूप श्रीवास्तव ने दिनेश सिंह द्वारा लिखी गयी नई कविता की चर्चा की और उन्हें न सिर्फ एक समर्पित गीतकार अपितु नई कविता का भी एक सशक्त हस्ताक्षर बताया। चंद्रप्रकाश पाण्डे ने बताया कि दिनेश सिंह ने न केवल गीत लिखे, बल्कि उन्होंने सवैया (गोपी शतक और नेत्र शतक), महाकाव्य (परित्यक्ता) के साथ गज़लें और छंदमुक्त कविताएं भी लिखी हैं। उन जैसे साहित्यकार, संपादक बहुत कम हुए हैं। जय चक्रवर्ती ने दिनेश सिंह को कबीर के अक्खड़ और फक्कड़ स्वभाव का हू-ब-हू संस्करण माना। शम्सुद्दीन अज़हर ने माना कि दिनेश सिंह की ग़ज़ल पर अच्छी पकड़ थी। वे इस विधा के माध्यम से भी अपनी संवेदनाओं को व्यक्त करने में सफल रहे। कार्यक्रम के संयोजक और ‘यदि‘ पत्रिका के सम्पादक रमाकान्त ने कहा कि दिनेश सिंह के कृतित्व और व्यक्तित्व दोनों का ही सम्यक मूल्यांकन किया जाना अभी शेष है। गीत और नवगीत को उन्होंने हिन्दी साहित्य के केन्द्र में लाने का जो कार्य किया है वह ऐतिहासिक है। समारोह में शिवकुमार शास्त्री, राधे रमण त्रिपाठी, अजीत आनन्द, राम करन सिंह, सुधीर बेकस ने भी दिनेश सिंह के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर अपने विचार व्यक्त किये।

इस अवसर पर अनियतिकालीन पत्रिका ‘यदि‘ के दिनेश सिंह पर केन्द्रित विशेषांक का लोकार्पण स्व दिनेश सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती मान कुमारी, उनकी सुपुत्री श्रीमती प्रीति सिंह, दामाद हंसराज सिंह की उपस्थिति में मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में श्रीमती मानकुमारी को ‘यदि‘ परिवार की ओर से सम्मानित भी किया गया। 

कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार शम्भू शरण द्विवेदी बन्धु, दुर्गाशंकर वर्मा दुर्गेश, देवेन्द्र देवन, निर्मला लाल, राजेश चन्द्रा, आर पी यादव, अभिषेक, राजेश, राजेन्द्र यादव, राम मिलन, अनिल कुमार आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। अध्यक्षता इण्टर कालेज महराजगंज के पूर्व प्रधानाचार्य शीतलदीन अवस्थी ने की जबकि मुख्य अतिथि युवा साहित्यकार अबनीश सिंह चैहान तथा विशिष्ट अतिथि रायबरेली के अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ओम धीरज रहे। संचालन जय चक्रवर्ती ने और धन्यवाद ज्ञापन शमसुद्दीन अज़हर द्वारा किया गया

Dinesh Singh Smrati Visheshank, Yadi, Raibareli

1 टिप्पणी:

  1. Wonderfully crafted article.Entire event is beautifully designed, reported and written.Thanks and congrats to Shri Avneeshji. Congratulations to editor of YADI Shri Ramakantji,organizers and every person who contributed in this edition of noble cause. I have been associated with the editor of this magazine for approximately a quarter century now and have been enriched and enlightened by his views on various subjects.

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