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शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

प्रभाकर श्रोत्रिय को विनम्र श्रद्धांजलि !

19 दिस 1938 - 16 सित 2016


प्रख्यात साहित्यकार एवं संपादक डॉ प्रभाकर श्रोत्रिय का जन्म १९ दिसम्बर १९३८ को जावरा, म. प्र. में हुआ। पिता की मृत्यु बचपन में ही हो जाने के कारण इन्हें काफी कष्टों से गुज़रना पड़ा। इनकी आरंभिक शिक्षा संस्कृत हिन्दी पाठशाला से आरंभ हुई। कक्षा छह में इनका दाखिला सरकारी विद्यालय में कराया गया। इन्होंने अपनी उच्च शिक्षा विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से प्राप्त की और बाद में एम.ए. करने के बाद वहीं पर प्राध्यापक हो गए। इसके पश्चात इन्होंने पी.एच.डी. और डी.लिट्. की उपाधि भी वहीं से अर्जित की।

प्रकाशित कृतियाँ

आलोचना- 'सुमनः मनुष्य और स्रष्टा', 'प्रसाद को साहित्यः प्रेमतात्विक दृष्टि', 'कविता की तीसरी आँख', 'संवाद', 'कालयात्री है कविता', 'रचना एक यातना है', 'अतीत के हंसः मैथिलीशरण गुप्त', जयशंकर प्रसाद की प्रासंगिकता'. 'मेघदूतः एक अंतयात्रा, 'शमशेर बहादूर सिंह', 'मैं चलूँ कीर्ति-सी आगे-आगे', 'हिन्दी - कल आज और कल'

निबंध- 'हिंदीः दशा और दिशा', 'सौंदर्य का तात्पर्य', 'समय का विवेक', 'समय समाज साहित्य'

नाटक- 'इला', 'साँच कहूँ तो. . .', 'फिर से जहाँपनाह'।

प्रमुख संपादित पुस्तकें: 
  1. 'हिंदी कविता की प्रगतिशील भूमिका'
  2. 'सूरदासः भक्ति कविता का एक उत्सव प्रेमचंदः आज'
  3. 'रामविलास शर्मा- व्यक्ति और कवि'
  4. 'धर्मवीर भारतीः व्यक्ति और कवि'
  5. 'समय मैं कविता', 'भारतीय श्रेष्ठ एकाकी (दो खंड)
  6. कबीर दासः विविध आयाम
  7. इक्कीसवीं शती का भविष्य नाटक 'इला' के मराठी एवं बांग्ला अनुवाद 
  8. 'कविता की तीसरी आँख' का अंग्रेज़ी अनुवाद
पुरस्कार और सम्मान

  1. अखिल भारतीय आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान),
  2. आचार्य नंददुलारे वाचपेयी पुरस्कार (मध्य प्रदेश साहित्य परिषद),
  3. अखिल भारतीय केडिया पुरस्कार,
  4. समय शिखर सम्मान (कान्हा लोकोत्सव, 1991),
  5. श्रेष्ठ कला आचार्य (मनुवन, भोपाल, 1989),
  6. अखिल भारतीय रामवृक्ष बेनीपुरी पुरस्कार (बिहार सरकार),
  7. अखिल भारतीय श्री शारदा सम्मान (म.प्र. के हि.सा. एवं संस्कृतिन्यास देवरिया) एवं
  8. माधव राव सप्रे पत्र संग्रहालय का रामेश्वर गुरु साहित्यिक पत्रकारिता पुरस्कार।
  9. मित्र मंदिर कोलकाता सम्मान 1998,
  10. सारस्वत सम्मान 2002
साक्षात्कार', 'अक्षरा', 'वागर्थ', पूर्वग्रह' और 'नया ज्ञानोदय' के संपादक रहे डॉ॰ प्रभाकर श्रोत्रिय ने साहित्य की लगभग सभी विधाओं में सफलतापूर्वक लेखन कार्य किया। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, इनका लिखा-छपा इनकी सदैव याद दिलाता रहेगा। पूर्वाभास परिवार की ओर से श्रद्धेय श्रोत्रिय जी को विनम्र श्रद्धांजलि !

Prabhakar Shrotriya

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