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सोमवार, 19 नवंबर 2018

पुस्तक लोकार्पण एवं साहित्यकार सम्मान समारोह


मथुरा : आलोक पब्लिक स्कूल, पंचवटी कॉलोनी के सभागार में रविवार को वरिष्ठ साहित्यकार संतोष कुमार सिंह की दो नयी पुस्तकों का लोकार्पण गरिमामयी एवं भव्य आयोजन में सम्पन्न हुआ। सर्वप्रथम दीप प्रज्जवलन एवं माँ शारदे के चित्र पर माल्यार्पण किया गया तथा स्व आलोक प्रताप सिंह की छवि पर पुष्प अर्पित करने के पश्चात कार्यक्रम आरम्भ हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अशोक अग्रवाल, अति विशिष्ट अतिथि महामंडलेश्वर योगी नवल गिरि महाराज एवं युवा साहित्यकार, सम्पादक डॉ अवनीश सिंह चौहान (वृन्दावन), डॉ प्रदीप गुप्त (दिल्ली) तथा अध्यक्ष डॉ अनिल गहलौत थे। डॉ अशोक अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि 'संतोष कुमार सिंह एक सच्चे और अच्छे लेखक हैं।' अपने बीज वक्तव्य में डॉ अवनीश सिंह चौहान ने कहा कि 'मिलनसार, सहज, संतोषी संतोष कुमार सिंह जी समकालीन हिन्दी साहित्य के सुपरिचित हस्ताक्षर हैं। उनकी लोकार्पित पुस्तकें इस बात का प्रमाण हैं कि उनकी लेखनी सतत प्रवाहमान तो है ही, उनकी सर्जना और सामजिक सरोकार भावकों का मार्गदर्शन करने में पूरी तरह से सक्षम हैं।'  

इस अवसर पर संतोष कुमार सिंह की दो पुस्तकों- "आग लगी है" (गीत संग्रह) तथा "स्मार्ट फोन और दादाजी" (बाल संग्रह) का लोकार्पण अतिथियों के कर कमलों से सम्पन्न हुआ। संतोष कुमार सिंह की ये 43 वीं और 44वीं पुस्तकें हैं। संतोष कुमार सिंह को बाल साहित्य की पुस्तक पर उ.प्र. हिंदी संस्थान से चालीस हजार रुपये का सोहन लाल द्विवेदी स्मृति पुरस्कार घोषित हुआ है। तदुपरांत, डॉ अनीता चौधरी के दो कहानी संग्रह, भगवान सिंह पौनिया का एक काव्य संग्रह तथा डॉ योगेश निर्भीक के छंद संग्रह सहित चार अन्य पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया।

प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी चार साहित्यकारों- सेवानिवृत न्यायाधीश एस.एस.यादव (आगरा), सूरज पाल सिंह सूरज (हाथरस)' बी.डी.मित्तल शूल (मथुरा) तथा मदन मोहन शर्मा अरविंद, मथुरा को 'आलोक स्मृति साहित्य भूषण सम्मान' प्रदान किया गया। साथ ही रवेन्द्र पाल सिंह रसिक ने अपने पिता की स्मृति में दिल्ली के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ इन्द्र सेंगर को 'बाबूसिंह स्मृति साहित्य-रत्न सम्मान' प्रदान किया। इसमें सम्मान पत्र, शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न एवं रु. 2100/- सम्मान राशि के रूप में दिए गये।

दि्वतीय सत्र में कवि सम्मेलन हुआ जो संध्या 6 बजे समाप्त हुआ। कवियों ने समसामयिक विषयों जैसे राजनीति, कन्या भ्रूण हत्या एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर निशाना साधा। लगभग 30 कवियों ने अपनी कविताएँ सुनायीं।

इस अवसर पर डॉ अनिल गहलौत, निशेष जार, रामनिवास शर्मा अधीर, डॉ अवनीश सिंह चौहान, शेषपाल सिंह शेष, हरवेन्द्र सिंह गौर, देवेन्द्र कुमार, धर्मवीर सिंह, अनुपम गौतम, मोहनलाल मोही, सुमन पाठक, अंजू शर्मा, डॉ नीतू गोस्वामी, रवेन्द्र पाल सिंह रसिक, हीरालाल सुमन, निखिता सिंह, डॉ विवेकनिधि, मूलचंद शर्मा, ब्रजभूषण वर्मा, तेजपालसिंह सेंगर, डॉ महेन्द्र सिंह, जयवीर सिंह, रतीन्द्र कुमार सेंगर, अग्गासिंह रवि यादव ,भगवती चतुर्वेदी ,पंडित शैलेंद्र शर्मा , अमित कुमार जैन आदि कवि एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित थे तथा संचालन डॉ रमाशंकर पांडेय ने किया।





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