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शनिवार, 15 दिसंबर 2018

वीरेन्द्र आस्तिक को 'संयोग गीत वैभव सम्मान'


भायंदर ​​(मुंबई), 9 दिसम्बर 2018: भायंदर से प्रकाशित होने वाली हिन्दी की विशुद्ध साहित्य पत्रिका 'संयोग' के बैनर तले देशभर से आए सुधी साहित्यकारों का भायंदर (पूर्व) स्थित 'उत्सव हॉल' में 'तृतीय सम्मान समारोह - 2018' में भव्य सम्मान किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वंदना से हुआ। तदुपरांत, गौरी त्रिपाठी ने अपनी मधुर आवाज में स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का मन मोह लिया। 
समारोह की अध्यक्षता करते हुए बरेली (उ.प्र.) से पधारीं डॉ महाश्वेता चतुर्वेदी ने कहा कि 'इस संस्था द्वारा साहित्यकारों का सम्मान पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है, जोकि अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण है।' कानपुर (उ.प्र.) से प्रतिष्ठित कवि एवं आलोचक वीरेन्द्र आस्तिक ने इस आयोजन के लिए आयोजक मण्डल की भूरि-भूरि प्रसंशा की और कहा कि 'ऐसे कार्यक्रम साहित्यकारों का न केवल मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि उनकी सर्जना को भी सामाज में प्रतिष्ठित करते हैं।' इस अवसर पर मुंबई-दूरदर्शन से जुड़े दिलीप कुमार तिवारी, प्रतिष्ठित शिक्षाविद पंडित लल्लन तिवारी ने भी अपने विचार रखे।

विचार श्रंखला के पश्चात देशभर से पधारे साहित्यकारों का सम्मान किया गया। वीरेन्द्र आस्तिक को 'संयोग गीत वैभव सम्मान' से विभूषित करते हुए 'संयोग' पत्रिका के ख्यातिलब्ध सम्पादक मुरलीधर पाण्डेय ने कहा कि 'वीरेन्द्र आस्तिक समकालीन हिन्दी साहित्य के बड़े गीतकार और आलोचक हैं, उनकी जितनी प्रसंशा की जाय, कम है।' वीरेंद्र आस्तिक का जन्म कानपुर (उ.प्र.) जनपद के गाँव रूरवाहार में 15 जुलाई 1947 को हुआ। आस्तिकजी के गीत, नवगीत, कविताएँ, रिपोर्ताज, ग़ज़ल, ललित निबंध, समीक्षाएँ आदि 'शब्दपदी', 'गीत वसुधा', 'सहयात्री समय के' आदि समवेत संकलनों सहित दैनिक जागरण, जन सन्देश टाइम्स, मधुमती, अलाव, साहित्य समीर, कविताकोश, अनुभूति, पूर्वाभास पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। 1980 में आपका पहला गीत संग्रह 'वीरेंद्र आस्तिक के गीत' नाम से प्रकाशित हुआ। 1982 में 'परछाईं के पाँव' एवं 1987 में 'आनंद ! तेरी हार है' (नवगीत संग्रह) प्रकाशित हुआ। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से आर्थिक सहयोग मिलने पर 'तारीख़ों के हस्ताक्षर' सन 1992 में प्रकाशित हुआ। इन्हीं दिनों दैनिक जागरण में आलेख आदि और मधुमती (राज.) में समीक्षायें प्रकाशित हुईं और आपका गद्य लेखन भी प्रारम्भ हो गया। आपके गीत संग्रह- 'आकाश तो जीने नहीं देता', 'दिन क्या बुरे थे' और ''गीत अपने ही सुने' साहित्य जगत काफी लोकप्रिय हुए और आपके द्वारा सम्पादित (आलोचना) पुस्तकें- 'धार पर हम' एवं 'धार पर हम (दो)' देशभर में सराही गयीं। 2013 में मासिक पत्रिका 'संकल्प रथ' (भोपाल) ने 'वीरेंद्र आस्तिक की रचनाधर्मिता' शीर्षक से एक महत्वपूर्ण अंक प्रकाशित किया। आपसे 'एल-60, गंगा विहार, कानपुर-208010, संपर्कभाष: 09415474755' पर संपर्क किया जा सकता है। 

इस अवसर पर डॉ महाश्वेता चतुर्वेदी (बरेली), डॉ गोविंद द्विवेदी (औरैया), बद्री नारायण पांडेय (मुंबई), डॉ चंपा श्रीवास्तव (रायबरेली), श्री विनोद कुमार भल्ला (मुंबई), श्री हरीलाल मिलन (कानपुर), डॉ एम एल गुप्ता आदित्य (भायंदर), श्रीमती कमलेश बख्शी (ताड़देव- मुंबई), डॉ महेंद्र प्रताप पांडेय 'नंद' उधमसिंह नगर), श्री अखिलेश निगम अखिल (लखनऊ), श्रीमती पूजाश्री (मुंबई), श्रीमती सुवर्णा अशोक जाधव (मुंबई), शिवानंद सिंह सहयोगी (मेरठ), श्री लक्ष्मण दुबे (मीरा रोड-ठाणे), श्री माताप्रसाद शुक्ल (ग्वालियर) को भी सम्मानित किया गया। तत्पश्चात कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रबुद्ध कवियों ने अपनी ओजस्वी रचनाओं को सुनाकर समां बांध दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन मुंबई आकाशवाणी के उद्घोषक राजेंद्र त्रिपाठी ने किया और आभार अभिव्यक्ति कार्यक्रम के आयोजक पंडित मुरलीधर पांडेय ने की।






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