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सोमवार, 6 अप्रैल 2020

पत्रकारिता में करियर— अवनीश सिंह चौहान


कुछ वर्ष पहले करियर के लिए अक्सर मेडिकल, इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, विधि, शिक्षण या प्रशासनिक सेवाओं जैसे गिने-चुने विकल्प ही दिखाई पड़ते थे। किन्तु, नई सदी के दूसरे दशक के उत्तरार्द्ध में यह परिदृश्य काफी कुछ बदल गया है, जिससे युवाओं की अभिरुचि करियर के कुछ नए विकल्पों की ओर भी बढ़ी है। इन विकल्पों में आय, पद, प्रतिष्ठा एवं सम्मान की दृष्टि से पत्रकारिता (प्रिंट, इलेक्ट्रोनिक एवं ऑनलाइन) एक लोकप्रिय करियर के रूप में उभरा है। 

पत्रिकारिता शब्द अंग्रेज़ी के 'जर्नलिज़्म' (Journalism) शब्द का हिंदी रूपांतर है। 'जर्नलिज्म' शब्द 'जर्नल' से बना है जिसका अर्थ है— 'दैनिक'। यहाँ दैनिक से तात्पर्य दैनिक क्रियाकलापों, घटनाओं, सूचनाओं का वस्तुपरक विवरण प्रदान करने से है। दूसरे अर्थों में तथ्यों, सूचनाओं एवं विचारों को समालोचनात्मक एवं निष्पक्ष विवेचन के साथ शब्द, ध्वनि, चित्र, चलचित्र, संकेतों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुँचाना ही पत्रकारिता है। यह एक ऐसी कला है जिससे देश, काल और स्थिति के अनुसार समाज को केंद्र में रखकर सारगर्भित एवं लोकहितकारी विवेचन प्रस्तुत किया जा सकता है। शायद इसीलिये आज संचार क्रांति, सूचना का आधिकार, आर्थिक उदारीकरण और इंटरनेट की जन-सुलभता के कारण इस क्षेत्र में सकारात्मक एवं रचनात्मक कार्य करने की अपार सम्भावनाएँ हैं। 

विस्तृत क्षेत्र

पत्रिकारिता संबंधित कार्य जीवन के हर क्षेत्र में उपलब्ध है। आवश्यकता सिर्फ इतनी है कि व्यक्ति यह सुनिश्चित कर ले कि उसकी अभिरुचि क्या है और वह किस क्षेत्र में पत्रिकारिता करना चाहता है। पत्रिकारिता के विविध रूप— आर्थिक पत्रकारिता, राजनीतिक पत्रकारिता, आध्यात्मिक पत्रकारिता, खोजी पत्रकारिता, खेल पत्रकारिता, मनोरंजन पत्रकारिता, महिला पत्रकारिता, बाल-पत्रकारिता, ग्रामीण पत्रकारिता, शहरी पत्रकारिता, कृषि पत्रकारिता, व्याख्यात्मक पत्रकारिता, विकास पत्रकारिता, संदर्भ पत्रकारिता, संसदीय पत्रकारिता, रेडियो पत्रकारिता, दूरदर्शन पत्रकारिता, फोटो पत्रकारिता, विधि पत्रकारिता, अंतरिक्ष पत्रकारिता, सर्वादय पत्रकारिता, चित्रपट पत्रकारिता, वॉचडॉग पत्रकारिता, पीत पत्रकारिता, पेज थ्री पत्रकारिता, एडवोकेसी पत्रकारिता, साहित्यिक पत्रकारिता आदि इस विधा को व्यापक क्षेत्र प्रदान करते हैं। 

पत्रकारिता के प्रमुख कोर्सेज

पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थी को किसी भी स्ट्रीम से 12वीं पास होना आवश्यक है। 12वीं के बाद वह किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से डिप्लोमा, सर्टिफिकेट या डिग्री कोर्स कर सकता है। भारत के कई संस्थान डिप्लोमा, सर्टिफिकेट या डिग्री लेवल पर जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्रदान करते हैं। यदि विद्यार्थी 12वीं के बाद पत्रकारिता में यूजी/स्नातक (अवधि— तीन वर्ष) करना चाहता है तो वह बी.ए. इन जर्नलिज्म, बी.ए. इन मास कम्यूनिकेशन, बी.ए. इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, बी.ए. इन मीडिया एंड कम्युनिकेशन, बी.बी.ए. इन मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म, बी.एससी इन एनीमेशन और मल्टीमीडिया कर सकता है। यदि विद्यार्थी स्नातक के बाद पत्रकारिता में डिप्लोमा (अवधि— एक वर्ष) करने का इच्छुक है तो वह स्नातक के बाद पीजी डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, पीजी डिप्लोमा इन पब्लिक रिलेशन, पीजी डिप्लोमा इन ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म, पीजी डिप्लोमा इन मास मीडिया, पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एन्ड मास कम्युनिकेशन कर सकता है। वह चाहे तो सीधे दो वर्षीय पीजी/परास्नातक डिग्री— एम.ए. इन जर्नलिज्म, एम.ए. इन मास कम्युनिकेशन या एम.ए. इन जर्नलिज्म एन्ड मास कम्युनिकेशन भी ले सकता है। पीजी/ परास्नातक करने के बाद एम.फिल और पीएचडी की जा सकती है।

पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए संस्थान 

· भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली
· माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता व संचार विश्वविद्यालय, भोपाल 
· एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, चैन्नई 
· मास मीडिया रिसर्च सेंटर, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली 
· जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन, मुंबई 
· सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन, पुणे 
· दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
· लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ
· बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
· बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, बरेली 

(सूचना उदाहरण मात्र है)

बेहतर जॉब एवं सैलरी 

पत्रकारिता में रोजगार एवं वेतनमान भरपूर है। यदि व्यक्ति किसी अच्छे संस्थान से पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त कर लेता है तो उसे आसानी से जॉब मिल सकती हैं, बशर्ते वह अपने विषय को ठीक से जानता-समझता हो और मेहनत और लगन से काम करना सीख ले। आज जब डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, प्रशिक्षक, प्रबंधक एवं प्रशासक आदि बनने की रेस में लोगों की रुचि कम हुई है, तब पत्रकारिता हर दृष्टि से एक अच्छा करियर विकल्प साबित हो सकता है। 

कभी ऐसा हो सकता है कि प्रिंट जर्नलिज्म (मैग्जीन, समाचार पत्र आदि), इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिज्म (ऑडियो, वीडियो, टीवी, रेडियो आदि), वेब पत्रकारिता एवं पब्लिक रिलेशन में व्यक्ति को किसी छोटे स्तर से अपने जॉब की शुरुआत करनी पड़ जाय। किन्तु, जैसे ही व्यक्ति का अनुभव बढ़ने लगता है, वैसे ही उसकी सैलरी एवं पद में भी बढ़ोतरी होने लगती है। आमतौर पर सामान्य जॉब के लिए शुरुआती वेतन भी काफी उत्साहजनक होता है, लेकिन यदि व्यक्ति का चयन किसी बड़े मीडिया समूह, कॉर्पोरेट हॉउस या इंडस्ट्री में होता हैं, तो उसे शुरुआत से ही अच्छा पैकेज मिलने लगता है। कुलमिलाकर इस क्षेत्र में भी दौलत एवं शोहरत खूब है। 

करियर ऑप्शन

पत्रकारिता पाठ्यक्रम करने के बाद निम्नलिखित करियर ऑप्शन हो सकते हैं— एडिटर, कार्टूनिस्ट, फोटो जर्नलिस्ट, प्रूफ रीडर, फीचर राइटर, लीड राइटर, क्रिएटिव राइटर, स्क्रिप्ट राइटर, रिपोर्टर, स्पेशल रिपोर्टर, ब्रॉडकास्ट रिपोर्टर, क्रिटिक, रिव्यूअर, प्रस्तुतकर्ता, शोधकर्ता, स्तम्भकार (कॉलमनिस्ट), डिरेक्टर, फ़िल्म मेकर, प्रोड्यूसर, ब्लिशर, पीआरओ, वीजे, आरजे, टीचर, प्रोफेसर आदि।

लेखक :  
'वंदे ब्रज वसुंधरा' सूक्ति को आत्मसात कर जीवन जीने वाले वृन्दावनवासी साहित्यकार डॉ अवनीश सिंह चौहान बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, बरेली के मानविकी एवं पत्रकारिता महाविद्यालय में प्रोफेसर और प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं।

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