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गुरुवार, 2 सितंबर 2021

नवगीत वाङ्मय — अवनीश सिंह चौहान


नवगीत वाङ्मय 

(Navgeet Vangmay)

सम्पादक : अवनीश सिंह चौहान 
प्रकाशन वर्ष : 2021 
पृष्ठ : 174  
मूल्य : रु. 200/- (After Discount)
ISBN : 978-93-5529-004-5 
प्रकाशक : ऑथर्सप्रेस 
Q2-A, हौज खास एन्क्लेव, नई दिल्ली- 110016 (भारत)
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समय-समय पर प्रबुद्ध नवगीतकारों के साथ-साथ समर्पित सम्पादकों ने समाज-निर्माण के उद्देश्य से नवगीत— गीत का आधुनिक संस्करण, की वैश्विक चेतना का विस्तार करने की भरपूर कोशिश की है। ऐसी ही एक कोशिश के रूप में इस संपादित पुस्तक— 'नवगीत वाङ्मय' (Navgeet Vangmay) को देखा जा सकता है, जिसके 'समारंभ' खण्ड में तीन संस्थापक नवगीतकारों— शम्भुनाथ सिंह, शिवबहादुर सिंह भदौरिया व राजेंद्र प्रसाद सिंह के संक्षिप्त परिचय सहित उनकी नवगीत पर टिप्पणियाँ एवं उनके तीन-तीन नवगीत, 'नवरंग' खण्ड में नौ प्रतिष्ठित नवगीतकारों— गुलाब सिंह, मयंक श्रीवास्तव, शान्ति सुमन, राम सेंगर, नचिकेता, वीरेंद्र आस्तिक, बुद्धिनाथ मिश्र, विनय भदौरिया व रमाकान्त के संक्षिप्त परिचय सहित उनकी नवगीत पर टिप्पणियाँ एवं उनके नौ-नौ नवगीत, 'अथबोध' खण्ड में दिनेश सिंह का 'नये-पुराने' पत्रिका (गीत अंक-5, 1999) से लिया गया एक सारगर्भित लेख, 'साक्षात्कार' खण्ड में मधुसूदन साहा से हुई अवनीश सिंह चौहान की महत्वपूर्ण बातचीत, और 'परिशिष्ट' खण्ड में नवगीत की प्रथम पंक्ति के साथ नवगीतकारों के नाम व पते को सहेजा गया है। इस संदर्भ में डॉ विमल (पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, वर्धमान विश्वविद्यालय, वर्धमान) का मानना है—"संपादन-कला के मर्मज्ञ आचार्यों से अपने सतत जुड़ाव के कारण मैं यहाँ यह बात साधिकार लिख रहा हूँ कि डॉ अवनीश सिंह चौहान द्वारा संपादित— 'नवगीत वाङ्मय' में प्रयुक्त संपादन-कला वस्तुतः शिखर-चुम्बी है। शिखर-चुम्बी इसलिए कि इस पुस्तक में प्रस्तुत अभिव्यंजना के प्रत्येक पक्ष (नवगीतकारों का चयन, नवगीतों का चयन, सुगठित टिप्पिणियाँ, लेख, साक्षात्कार आदि) में संपादक ने जिस कौशल को प्रस्तुत किया है, वह सराहनीय ही नहीं, अनुकरणीय भी है। चयन व संपादन कला में दक्षता हेतु संपादक महोदय को मेरी बहुत-बहुत बधाई।"


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Navgeet Vangmay ed. by Abnish Singh Chauhan

2 टिप्‍पणियां:

  1. नवगीत के सरोकारों को व्यापक पटल देकर अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने के लिए अवनीश जी का प्रयास महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है।एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब हिन्दी कविता का मेघाच्छन्न आकाश साफ होगा और छान्दसिक कविता के रूप में नवगीत हिन्दी कविता की प्रमुख पहचान बनेगा।उस दिन गीतकारों से अधिक इसके उद्धर्ताओं को याद किया जाएगा।अवनीश जी का नाम उस सूची में प्रमुख सात व्यक्तियों में होगा।

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  2. पुस्तक मंगवा लिया हूँ.

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