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सोमवार, 25 अक्तूबर 2010

ई-पत्रिका गीत-पहल का लोकार्पण




कार्यालय संवाददाता, मुरादाबाद : नवगीत के रस सभी को लुभाते हैं। गीतों के साथ अक्सर हम भी जुगलबंदी करने लगते हैं। आमतौर पर हमें पसंदीदा गीत नहीं मिल पाते। गीत-संग्रह की किताबें महंगी होने के कारण आम पाठक इस सुखद अनुभूति से वंचित रह जाते हैं तो कई बार पसंदीदा कवियों की किताबें नहीं मिल पाती। गीत प्रेमियों को परेशान होने की जरूरत नहीं। अब घर बैठे गीतों का आनंद ले सकेंगे। नेट पर साहित्यिक पत्रिकाएं तो कई हैं लेकिन गीत विधा की पत्रिकाएं न के बराबर हैं। गीतों को विश्व पटल पर स्थान दिलाने की तैयारी है। इस पुनीत कार्य को पूरा करने का बीड़ा मुरादाबाद के साहित्यकारों ने उठाया है। केवल गीत विधा की पत्रिका जल्द ही नेट पर आने वाली है। गीत पहल नाम की इस इंटरनेट पत्रिका का संपादन पूरा हो चुका है। कुछ तकनीकी काम बाकी है। वह भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इसका विमोचन 24 अक्टूबर को कराया जाएगा। खास बात यह है कि इस इंटरनेट गीत पत्रिका में देश भर के नामचीन साहित्यकारों के अलावा क्षेत्रीय कवियों के गीत और नवगीत पढ़े जा सकेंगे। छंद को भूलती भावी पीढ़ी के लिए इसमें एक से बढ़कर छंद युक्त कविताओं को समाहित किया गया है। आम पाठकों के लिए भी छंद मुक्त कविताएं होंगी। गीत पहल के संपादक मंडल में शामिल अवनीश सिंह चौहान, आनंद गौरव, रमाकांत और योगेंद्र वर्मा व्योम आदि इसमें रंग भर रहे हैं। गीत पहल में कवियों के गीत, नवगीत के अलावा संस्मरण, साक्षात्कार, आलेख, मत-मतांतर और चित्रावली का समावेश किया गया है। 24 अक्टूबर को गीत-पहल के विमोचन की तैयारी है। संपादक मंडल के सदस्य योगेंद्र वर्मा व्योम ने बताया कि पत्रिका का विमोचन करने के लिए गीतकार बुद्धिनाथ मिश्र को आमंत्रित किया गया है।

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मुरादाबाद, भारत: साहित्यिक ई-पत्रिका गीत-पहल का शिव मंदिर सभागार हिमगिरि कालोनी में लोकार्पण किया गया। इस पत्रिका में अभी तक देशभर के 52 गीतकारों के नवगीत सम्मिलित किए गए हैं। इसमें विशिष्ट रचनाकार, उनकी रचनाओं, संस्मरण, साक्षात्कार, समीक्षा, मत-मतांतर, साहित्यिक हलचल आदि का समावेश किया गया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार डा.बुद्धिनाथ मिश्र, विशिष्ट अतिथि डा.महेश दिवाकर और शचींद्र भटनागर ने इस कदम की सराहना की। संपादक मंडल सदस्य अवनीश सिंह चौहान ने बताया कि गीत-पहल पूरी तरह गीत और नवगीत को समर्पित ई-पत्रिका है। योगेंद्र वर्मा व्योम ने इस कोशिश का मकसद गीतों को विश्र्व पटल पर स्थान दिलाना बताया। अध्यक्षता माहेश्र्वर तिवारी ने एवं संचालन अवनीश सिंह चौहान ने किया। इस मौके पर आयोजित काव्यपाठ की रसधार में हर कोई डूब गया। वीरेंद्र सिंह बृजवासी ने जाति से कब कर्म निर्धारण हुआ, कर्म से ही जाति का निर्धारण हुआ, जो जिया इस सत्य के विपरीत जाकर, वही सबके कष्ट का कारण हुआ का पाठ कर जातीय वैमनस्यता को दूर करने की कोशिश की। मूलचंद राज ने जब भी उलझन में होता हूं याद बहुत आती है मां, चाहे जैसी भी उलझन हो चुटकी में सुलझाती मां का पाठ कर वात्सल्य का बोध कराया। इसके अलावा सतीश सार्थक, परवाना, डा. ऋचा निखिल, रामदत्त द्विवेदी, डा. ओमाचार्य, जितेंद्र कुमार जौली, यशपाल सिंह खामोश, नत्थूलाल शर्मा, डा. मीना नकवी, निखिलेश कुमार पाठक, योगेंद्र पाल सिंह विश्नोई, रघुराज सिंह निश्चल, मनोज वर्मा, शिशुपाल मधुकर, विवेक निर्मल आदि ने काव्यपाठ किया। तकनीकी सहयोग दिया राजीव कुमार (टी एम् यूं)  ने तथा संपादक मंडल के सदस्य आनंद कुमार 'गौरव' ने आभार व्यक्त किया।


दैनिक जागरण से साभार

संलग्न: फोटो  (हिमगिरी कालोनी के शिव मंदिर सभागार में साहित्यिक इंटरनेट पत्रिका का लोकार्पण करते माहेश्वर तिवारी व् बुद्धिनाथ मिश्र , साथ में हैं डॉ महेश दिवाकर, आनंद कुमार 'गौरव', योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' एवं अवनीश सिंह चौहान) 
गीत-पहल का लोकार्पण
E-patrika Geet-pahal Ka Lokarpan


 

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