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सोमवार, 12 सितंबर 2011

कैमरे की आँख और बोलतीं तस्वीरें



मुरादाबाद (रविवार): हमारी आंख जो नहीं देख पाती, उसे कैद कर लेती हैं कैमरे की आँखें अपने ढंग से और ये कैद की गयीं तस्वीरें बोलतीं है उन सभी से जो सुनना चाहते है वह सब कुछ जो देखा है कैमरे ने। और यह अवसर प्रदान किया सांस्कृतिक संस्था आरोही ने अपने छायांकन समारोह के माध्यम से । फोटो प्रेमियों के लिए यह सुखद शाम थी, तो आम दर्शकों के लिए नई अनुभूति। देश के नामचीन छायाकारों की फोटो प्रदर्शनी व स्लाइड शो ने देश की भौगोलिक, सांस्कृतिक थाती का जीवंत अहसास कराया तो फोटो में जिंदा होती परछाइयों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस सुखद क्षण का गवाह बना आईएमए सभागार। मौका था आरोही की ओर से नामचीन छायाकारों के चित्रों की प्रदर्शनी का।

कार्यक्रम का शुभारंभ नगर आयुक्त लालजी राय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। ऋता आर्य ने मां शारदा की वंदना कर कार्यक्रम को गति दी। समारोह के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध छायाकार उमेश मेहता और विशिष्ट अतिथि बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डा.संजीव लाल रहे। प्रदर्शनी में नामचीन छायाकार अविनाश पसरीचा की आंखों ने जिन रंगों को देखा, वे तस्वीरें दर्शकों को प्रभावित कर गई। उनके चित्रों में संपूर्ण भारत की जीवंत तस्वीर दिखी तो हर चित्र ने जीवंतता का अहसास कराया। गुलाम अली खां, बिरजू महराज सरीखे कलाकारों के जीवन की विभिन्न प्रस्तुतियां फोटो में संजोई। फिर चाहे रियाज का क्षण हो या मंच पर तल्लीन भाव। उमेश मेहता ने चित्रों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर की यात्रा कराई।

जीवंतता का अहसास कराते हैं चित्र: मशहूर फोटोग्राफर उमेश मेहता कहते हैं कि फोटो से जीवन का सबसे करीब रिश्ता है। फोटो जीवंतता का अहसास कराते हैं। आमतौर पर हमारी आंखें जो नहीं देख पाती, कैमरे की आंख से वह भी नहीं बच पाता। फोटोग्राफी की तकनीक में हो रहे विकास को छाया क्रांति मानते हैं। आज विश्र्वविद्यालयों में छायांकन एक विषय के रूप में पढ़ाए जाने की सुविधा है।

फोटोग्राफी एक पैशन: मशहूर फोटोग्राफर अविनाश पसरीचा कहते हैं जिंदगी में पैशन होना चाहिए, यही पैशन व्यक्ति को मुकाम तक पहुंचाता है। वह कहते हैं पचास साल पहले न तो इतने अच्छे कैमरे थे और न ही संसाधन। कलाकार को अपने टेलेंट के बल पर ही मान्यता मिलती थी। संघर्ष अधिक था, पैसा कम। आज मोबाइल ने हर व्यक्ति को फोटोग्राफर बना दिया है, उन्होंने फोटोग्राफी की चुनौती को असाइनमेंट के रूप में लेने की बात कही। आज छायांकन एक करियर बन चुका है।

संस्था सचिव डा.जगदीप कुमार ने अतिथि छायाकारों का परिचय प्रस्तुत किया। अविनाश पसरीचा ने 36 वर्षो तक स्पैन मैगजीन के छाया विभाग में मुख्य संपादक के रूप में कार्य किया। इस मौके पर माहेश्र्वर तिवारी, विशाखा तिवारी, योगेन्द्र वर्मा 'व्योम', अवनीश सिंह चौहान, लक्ष्मण प्रसाद खन्ना, वीरेंद्र अग्रवाल, अजीत अग्रवाल, डा. यू के शाह, मंजुला सिंहल, अनिल महेश, वी के माथुर, दीपक बाबू सीए, संजय माहेश्र्वरी, तेजपाल सिंह, राकेश खन्ना, सुमन लता गुप्ता आदि मौजूद रहे। तेजपाल सिंह, नितिन कश्यप, सुमन लता गुप्ता, रोहित पुरी आदि का सहयोग रहा। संचालन डा. जगदीप कुमार ने किया। आभार दीपक बाबू और संजय माहेश्वरी ने व्यक्त किया।

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  2. अच्छी कसावदार रिपोर्ट .बधाई ..http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2011/09/blog-post_13.हटमल
    अफवाह फैलाना नहीं है वकील का काम .

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  3. फोटो बिना बोले ही बहुत कुछ कहने की लाजवाब कला है .. अच्छी रिपोर्ट ...

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