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सोमवार, 19 दिसंबर 2011

अदम गोंडवी का निधन- एक श्रद्धांजलि

अदम गोंडवी


गोंडा। हिंदी के जनवादी कवि और गजलकार रामनाथ सिंह 'अदम गोंडवी' का लीवर की गंभीर बीमारी के कारण पिछले दिनों निधन हो गया। उन्हें लीवर सिरोसिस की बीमारी थी। यह बीमारी उन्हें जहरखुरानी के कारण हुई थी। वे 63 वर्ष के थे। 22 अक्टूबर 1947 को गोस्वामी तुलसीदास के गुरु स्थान सूकर क्षेत्र के करीब परसपुर (गोंडा) के अटा ग्राम में स्व. श्रीमती मांडवी सिंह एवं देवी कलि सिंह के पुत्र के रूप में बालक रामनाथ सिंह का जन्म हुआ जो बाद में अदम गोंडवी के नाम से सुविख्यात हुए। उनके एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं।

उनका महीने भर से इलाज चल रहा था। रविवार की सुबह लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव परसपुर विकासखंड के आटा गांव में किया गया।

कहा जाता है कि हिंदी गज़लों की दुनिया में दुष्यंत कुमार के बाद जिन शीर्षस्थ रचनाकारों को जाना जाता है उनमें अदम गोंडवी भी एक रहे। उन्होंने  अपनी रचनाओं में सामंतवादी ताकतों, भ्रष्टाचारियों, कालाबाजारियों और पाखंडियों के खिलाफ न केवल लिखा, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी उन सबका पुरजोर विरोध किया।  'धरती की सतह पर' एवं 'समय से मुठभेड़' आदि उनके ग़ज़ल संग्रह की कई रचनाएँ जनता की  जुबान पर हैं। भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी वे खूब पढ़े जाते रहे हैं। यद्यपि उन्हें कई सम्मान-पुरस्कार समय-समय पर प्रदान किये गये,  वर्ष ।998 में मध्य प्रदेश सरकार ने भी उन्हें 'दुष्यंत कुमार पुरस्कार प्रदान' किया था। उनकी याद में उनकी एक गज़ल यहाँ पर प्रस्तुत है-

काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में
उतरा है रामराज विधायक निवास में।

पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत
इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में।

आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह
जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में।

पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें
संसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास में।

जनता के पास एक ही चारा है बगावत
यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में।

1 टिप्पणी:

  1. श्रधेय अदम गौंडवी को भोपाल में दुष्यंत संग्रहालय में सुना था .उनकी हर ग़ज़ल पर श्रोता मंत्रमुग्ध हो तालिया बजने से अपने को रोक नहीं पते थे जैसे ही उनके निधन की खबर पढी ,मैंने भोपाल राजुर्कार्राज को फ़ोन किया .उनके निधन से एक एसा गज़लकार उठ गया जिसकी क्षति पूर्ती नाक्मुम्किन है
    पस्तुत ग़ज़ल की हर पंक्ति अधभुत है और समसामयिकता का सच्चा परिद्रश्य उपस्थित करती है .आदरांजलि के साथ आपको भी धन्यवाद की .की आपने उनकी यादों को ताज़ा क्र दिया .
    परम पिता परमात्मा से प्रार्थना है उनके संतप्त परिवार को कष्ट सहन की शक्ति दे..
    डॉ जयजयराम आनंद परिवार
    सैंट जॉन कनाडा

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