पूर्वाभास पर आपका हार्दिक स्वागत है। 2012 में पूर्वाभास को मिशीगन-अमेरिका स्थित 'द थिंक क्लब' द्वारा 'बुक ऑफ़ द यीअर अवार्ड' प्रदान किया गया। 2014 में मेरे प्रथम नवगीत संग्रह 'टुकड़ा कागज का' को अभिव्यक्ति विश्वम् द्वारा 'नवांकुर पुरस्कार' एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा 'हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान' प्रदान किया गया। इस हेतु सुधी पाठकों और साथी रचनाकारों का ह्रदय से आभार।

शनिवार, 6 दिसंबर 2014

मयंक श्रीवास्तव को नवगीतकार सम्मान

सम्मान प्राप्त करते भोपाल के वरिष्ठ कवि मयंक श्रीवास्तव जी 

जबलपुर : वरिष्ठ कवि मयंक श्रीवास्तव जी को उनके गीत संग्रह 'सहमा हुआ घर' के लिए जबलपुर (म प्र) की साहित्यक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था 'कादम्बरी' द्वारा स्व सरस्वती सिंह की स्मृति में 'नवगीतकार सम्मान' से अलंकृत किया गया। मयंक श्रीवास्तव जी को यह सम्मान 29 नवम्बर 2014 को आयोजित कादम्बरी के भव्य सम्मान समारोह में प्रज्ञानंद जी महाराज, आचार्य भगवत दुबे, डॉ. गार्गिशरण मिश्र 'मराल' आदि ने प्रदान किया। उन्हें सम्मान स्वरुप 5000/- रुपये, शॉल-श्रीफल एवं सम्मान पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर सर्वश्री निर्मल शुक्ल, ब्रजभूषण सिंह गौतम 'अनुराग', मधुप्रसाद, ज्ञानेन्द्र साज़, वंदना सक्सेना, रजनी मोरवाल, आनंद तिवारी आदि को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर श्री सुरेन्द्र बाजपेयी उपस्थित नहीं हो सके, अतः उनका सम्मान पारसनाथ गोवर्धन जी को सौंप दिया गया। सम्मान समारोह के उपरांत कवि सम्मेलन रखा गया, जिसमें शहर और अन्य शहरों से पधारे रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। 

"इस शहर में आजकल / हर शख्स सन्नाटा बुने /बन्धु अपने पाँव से कुछ आहटें पैदा करो"- ये चर्चित पंक्तियाँ लिखने वाले आदरणीय मयंक जी एक ऐसे रचनाकार हैं जो आज के कठियाये समय में भी आहटें- टकराहटें पैदा करने हेतु न केवल स्वयं प्रयासरत है बल्कि अपने सहयात्रियों का भी सस्नेह आवाहन कर रहे हैं। आपके गीत तो बोलते ही हैं, आपके गीत-संग्रह अपने शीर्षकों के माध्यम से भी बहुत कुछ कह देते हैं- 'सूरज दीप धरे' (गीत-संग्रह) उजाला और आनन्द का प्रतीक, 'सहमा हुआ घर' (गीत-संग्रह) घर-परिवार के टूटते रिश्तों-संबंधों का शब्द-चित्रण, 'इस शहर में आजकल' (गीत-संग्रह) शहरीकरण एवं वैश्वीकरण के दुष्प्रभावों की सटीक व्यंजना, 'उंगलियाँ उठती रहें' (गीत-संग्रह) फिर वही आहट-टकराहट की बात इस पीड़ा के साथ- "वही महल है वही संतरी/ बंदे वही मिले/ राजा बदला मिला मगर/ कारिन्दे वही मिले''। आपने 'प्रेस मेन' का कुशल संपादन किया। आपका जन्म उ.प्र. के आगरा जिले की तहसील फिरोजाबाद (अब जिला) के छोटे से गाँव 'ऊंदनी' में 11 अप्रेल 1942 को हुआ। वर्ष 1960 से माध्यमिक शिक्षा मंडल, म.प्र. भोपाल में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए दिसंबर 1999 में सहायक सचिव के पद से सेवानिवृत्त। वरिष्ठ गीतकार के रूप में आपको म प्र के महामहिम राज्यपाल द्वारा सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जा चुका है। म.प्र. लेखक संघ के 'हरिओम शरण चौबे गीतकार सम्मान', कला मंदिर द्वारा 'साहित्य प्रदीप' एवं अभिनव कला परिषद् द्वारा 'अभिनव शब्द शिल्पी सम्मान' से भी आपको विभूषित किया जा चुका है।

Mayank Sreevastav ko Navgeetkar Samman

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