पूर्वाभास पर आपका हार्दिक स्वागत है। 2012 में पूर्वाभास को मिशीगन-अमेरिका स्थित 'द थिंक क्लब' द्वारा 'बुक ऑफ़ द यीअर अवार्ड' प्रदान किया गया। 2014 में मेरे प्रथम नवगीत संग्रह 'टुकड़ा कागज का' को अभिव्यक्ति विश्वम् द्वारा 'नवांकुर पुरस्कार' एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा 'हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान' प्रदान किया गया। इस हेतु सुधी पाठकों और साथी रचनाकारों का ह्रदय से आभार।

सोमवार, 28 नवंबर 2016

आपस सम्मान समारोह


फैजाबाद: लोक अपनी भाषा का निर्माता खुद होता है। रचना को समय के सन्दर्भ से देखना चाहिए। त्रिलोचन धूल से सने हुए पारम्परिक शब्दों को प्राथमिकता देकर शब्दों के प्रति सजग दृष्टि और गहराई में उतर कर काव्य में छटा भरते हैं। अनपढ़ अशिक्षितों में बैठकर भाषा की समझ और शक्ति को समझना उनकी शक्ति थी इसीलिए देशज शब्दों में कथ्य और शिल्प की विभाजन रेखा नहीं खीचीं जा सकती। भंगिमा और चेष्टाओं से वे लोक को पकड़ते थे। यही कारण है कि त्रिलोचन कविता में निष्क्रय नहीं होते। निराला और त्रिलोचन की ताजगी तो हमेशा बनी रहेगी त्रिलोचन विश्वलोक के किसान कवि है। उक्त विचार कमल नयन पाण्डेय ने आपस सम्मान समारोह में त्रिलोचन की कविता विषय पर व्याख्यान में व्यक्त किये। कार्यक्रम का आयोजन आचार्य विश्वनाथ पाठक शोध संस्थान ने किया। 

इसके पहले कार्यक्रम का प्रारम्भ दीप प्रज्वलन और आचार्य विश्वनाथ पाठक की बहुचर्चित कृति सर्वमंगला के पाठ से हुआ। संस्थान के निदेशक डाॅ विंध्यमणि ने सभी का स्वागत किया। भारतीय प्रेस परिषद् के पूर्व सदस्य शीतला सिंह और कमलनयन पाण्डेय ने गोण्डा जनपद के साहित्यकार डाॅ सूर्यपाल सिंह को आचार्य विश्वनाथ पाठक स्मृति आपस सम्मान प्रदान किया। इसके अन्तर्गत अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र और इक्यावन सौ रूपये की धनराशि प्रदान की गई। लाल बहादुर शास्त्री पी जी कालेज गोण्डा के डाॅ शैलेन्द्र नाथ मिश्र ने सूर्यपाल सिंह के रचनाकर्म पर प्रकाश डाला। शीतला सिंह ने कहा कि सूर्यपाल जी जीवन और जमीन के साहित्यकार है। मामूली व्यक्ति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है। 

अध्यक्षता करते हुए साकेत महाविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डाॅ जनार्दन उपाध्याय ने कहा कि सूर्यपाल जी का सम्मान इस संस्था के सम्मान की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। इस अवसर पर डाॅ अनुराग मिश्र, कृष्ण प्रताप सिंह, विजय रंजन, डाॅ सुमति दूबे, डाॅ ओंकार त्रिपाठी, डाॅ पार्थसारथी पाण्डेय, डाॅ मनीष माथुर, आशाराम जागरथ, देव प्रसाद पाण्डेय, डाॅ नीलमणि सिंह, पवन कुमार सिंह, उमाशंकर श्रीवास्तव, सुनीता सिंह, डाॅ नरेन्द्र पाण्डेय, शिवमूर्ति चन्द्रेश, डाॅ के पी दुबे, यज्ञराम मिश्र यज्ञेस, रामकेवल सिंह, डाॅ महेन्द्र प्रताप वर्मा, डाॅ शिवेन्द्र सिंह आदि के साथ-साथ अनेक साहित्य सेवी उपस्थित रहे। अंत में संस्थान के निदेशक डाॅ विंध्यमणि ने सभी आगन्तुकों के प्रति आभार ज्ञापित किया।

Faizabad, U.P.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आपकी प्रतिक्रियाएँ हमारा संबल: