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शुक्रवार, 30 मार्च 2018

दो मिनट का मौन - केदारनाथ सिंह

केदारनाथ सिंह (1934-2018)

दो मिनट का मौन - केदारनाथ सिंह Two-Minute Silence - Kedarnath Singh
भाइयो और बहनो 
यह दिन डूब रहा है 
इस डूबते हुए दिन पर 
दो मिनट का मौन 

जाते हुए पक्षी पर 
रुके हुए जल पर 
झिरती हुई रात पर 
दो मिनट का मौन 

जो है उस पर 
जो नहीं है उस पर 
जो हो सकता था उस पर 
दो मिनट का मौन 

गिरे हुए छिलके पर 
टूटी हुई घास पर 
हर योजना पर 
हर विकास पर 
दो मिनट का मौन 

इस महान शताब्दी पर 
महान शताब्दी के महान इरादों पर 
और महान वादों पर 
दो मिनट का मौन 

भाइयो और बहनो 
इस महान विशेषण पर 
दो मिनट का मौन 
Brothers and sisters
The day is going to set
On this sinking day
Let's observe two-minute silence.

On the bird flying away
On the stagnant water
On the falling night
Let's observe two-minute silence.

On what exists
On what is not
On what could be
Let's observe two-minute silence.

On the fallen rind
On the broken grass
On every plan
On every development
Let's observe two-minute silence.

On this great century
On grand intentions of the great century
And on great promises
Let's observe two-minute silence.

Brothers and sisters 
On this great adjective
Let's observe two-minute silence.

Translated by Abnish Singh Chauhan

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