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शुक्रवार, 28 मई 2021

समीक्षा : 'नवगीत कोश : एक संग्रहणीय शोध ग्रन्थ' — अवनीश सिंह चौहान

संपादित कृति : नवगीत कोश 
संपादक : डॉ रामसनेही लाल शर्मा 'यायावर', 
प्रकाशक : निखिल पब्लिशर्स एण्ड डिस्ट्रीब्यूटर्स, आगरा
प्रथम संस्करण 2020, पृष्ठ- 640, मूल्य- रु 500/- 

"नवगीत और नई कविता दोनों अपनी परंपरा का उत्स निराला के काव्य से स्वीकार करते हैं" (नवगीत कोश, पृ.64)। काव्यरूपी इस अजस्त्र स्रोत से फूटी यह धारा आज भी सतत प्रवहमान है। शायद इसीलिये मूर्धन्य साहित्यकार डॉ रामसनेही लाल शर्मा 'यायावर' ने 'नवगीत कोश' (एमेरिट्स फैलोशिप की परियोजना में पूर्ण शोध कार्य) के माध्यम से भोले शंकर की जटाओं की तरह इस अबाध धारा को समेटने का सार्थक प्रयास किया है। कहने का आशय यह कि उनके द्वारा कुशलतापूर्वक सम्पादित किया गया यह कोश न केवल नवगीत से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार की सूचनाओं/ तथ्यों को अपने में समाहित किये हुए हैं, बल्कि बहुविध भारतीय जीवन और संस्कृति की विविध झाँकियों को इतिहास-सम्मत प्रमाणों के माध्यम से भी समेटे हुए है। 

 'नवगीत कोश' का अध्ययन-मनन करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि नवगीत विधा में रुचि लेने वाले भावक नवगीत की विकास यात्रा को जानने-समझने के लिए निश्चय ही इस पुस्तक को देखना चाहेंगे। ऐसा इसलिए कि इस पुस्तक में नवगीत की विकास यात्रा को पाँच खण्डों— 1. प्रस्तावना (वृहद सम्पादकीय), 2. प्रकाशित नवगीत संग्रह परिचय एवं समवेत संकलन, 3. नवगीतकार परिचय, 4. समीक्षा ग्रन्थ, अप्रकाशित शोध ग्रन्थ एवं पत्र-पत्रिकाएँ, 5.नवगीतकारों से साक्षात्कार —  में विभक्त किया गया है।  यद्यपि इस कोश में नवगीत के इतिहास, वर्तमान और भविष्य से संदर्भित बहुत से पहलुओं को विधिवत प्रस्तुत किया गया है, फिर भी कई बार इस प्रकार के बड़े काम करने में कई जरूरी चीजें छूट जाती हैं (यद्यपि ऐसा न हो तो ज्यादा अच्छा रहेगा ही)। शायद इसीलिये प्रबुद्ध सम्पादक यायावर जी ने पिछले दिनों यह घोषणा भी की कि वे उन छूटी हुए जरूरी तथ्यों/सूचनाओं को इस नवगीत कोश के द्वितीय खंड में सहर्ष सहेजना चाहेंगे। उन्होंने नवगीत के रसिकों से अपील भी की है कि यदि किसी प्रकार की कोई सूचना या तथ्य इसमें संकलित होने से रह गया हो या कोई अन्य प्रकार की कोई त्रुटि हो गयी हो, तो कृपया वे अविलम्ब उनसे संपर्क कर उन बातों को उनके संज्ञान में लाने का कृपापूर्वक कष्ट करें ताकि इस कोश को और अधिक समृद्ध किया जा सके। 
 
(इतने पर भी यदि किसी महानुभाव को इस पुस्तक से या संपादक से कोई शिकवा-शिकायत है और वे इसे अक्षम्य कोटि का मानते हैं तो उन महानुभाव से विनम्र आग्रह है कि वे स्वयं इस प्रकार का कोई अन्य बड़ा कार्य करके अपना प्रतिरोध दर्ज करने की कृपा करें, जिससे निश्चय ही नवगीत का भला होगा)

इस ऐतिहासिक पुस्तक के प्रकाशन पर यायावर जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ और निखिल पब्लिशर्स को साधुवाद।

[संपादक से संपर्क : 9412316779, ईमेल- dryayavar@gmail.com; प्रकाशक से संपर्क: 94580 09531]

Navgeet Kosh, reviewed by Abnish Singh Chauhan

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