पूर्वाभास पर आपका हार्दिक स्वागत है। 2012 में पूर्वाभास को मिशीगन-अमेरिका स्थित 'द थिंक क्लब' द्वारा 'बुक ऑफ़ द यीअर अवार्ड' प्रदान किया गया। 2014 में मेरे प्रथम नवगीत संग्रह 'टुकड़ा कागज का' को अभिव्यक्ति विश्वम् द्वारा 'नवांकुर पुरस्कार' एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा 'हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान' प्रदान किया गया। इस हेतु सुधी पाठकों और साथी रचनाकारों का ह्रदय से आभार।

शनिवार, 19 जनवरी 2013

इम्माक्यूली इलीबागीज़ा को 'बुक ऑफ़ द यीअर अवार्ड'


इम्माक्यूली इलीबागीज़ा
ब्लूमफील्ड, मिशीगन। अमेरिका स्थित 'द थिंक क्लब पब्लिकेशन्स' ने इस वर्ष का 'बुक ऑफ़ द यीअर अवार्ड' रवांडा (अफ्रीका) में जन्मी इम्माक्यूली इलीबागीज़ा (1972) को उनकी पुस्तक 'लेफ्ट टु टेल' को प्रदान करने की घोषणा की है। 'द थिंक क्लब पब्लिकेशन्स' यह पुरस्कार अल्पज्ञात और उभरते रचनाकारों को प्रदान किया जाता है। वर्ष 1994 की बात है। इम्माक्यूली नेशनल यूनीवर्सिटी से इलैक्ट्रीकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढाई कर रही थीं। इसी समय उनके देश में जातीय एवं मजहबी हिंसा भड़क उठी। उनके परिवार के सभी सदष्यों की हत्या कर दी गयी; पर इम्माक्यूली किसी तरह से बच निकलीं। इन विषम स्थितियों में उनकी आस्था जगी और वे परमेश्वर में विश्वास करने लगीं। इसी दौरान वे यूनाइटेड नेशन्स की सदष्य बनी और चार वर्ष बाद न्यूयार्क चली आयीं। 2006 में स्टीव इरविन के साथ लिखी अपनी बेस्ट सेलर पुस्तक 'लेफ्ट टु टेल' (कहने को बाकी) में उन्होंने अपनी पिछली जिन्दगी के तमाम कटु अनुभवों को उजागर करते हुए कहा कि सच्ची आस्था एवं विश्वास जीवन को ऊर्जा प्रदान करता है और यह ऊर्जा जीवनीशक्ति बनकर विषम परिस्थितियों में हमारा मार्ग प्रशस्त करती है। ऐसे में जीवन में आया भय और दुःख शांति, प्रेम, दया, क्षमा और करुणा का रूप लेकर जीव मात्र के हित की प्रेरणा देते हैं। 2007 में उन्होंने 'लेफ्ट टु टेल चेरिटेबल फंड' की भी स्थापना की, जिसके माध्यम से वे रवांडा के अनाथ बच्चों की सहायता करती हैं। इसी वर्ष शांति और सद्भावना का सन्देश देनेवाली इम्माक्यूली को 'द महात्मा गांधी इंटर्नेशनल अवार्ड' से विभूषित किया गया था। वर्तमान में इम्माक्यूली प्रवक्ता और लेखक के रूप में कार्य करते हुए समाज सेवा कर रही हैं।

विगत वर्षों में 'बुक ऑफ़ द यीअर अवार्ड' अवनीश सिंह चौहान (2012), मेरी रोच (2011), क्ले शिरकी (2010), चार्ल्स आर मोरिस (2009), माइकल गेट्स गिल (2008), कार्ल सागन (2007), सिंडी ला फरले (2006), टॉम वोल्फ (2005), फ्रेड रोजर्स (2004), स्टीफेन हाकिंग्स (2003), डेविड मेकक्लो (2002), डावा सोबेल (2001), दलाई लामा (2000) को प्रदान किया जा चुका है।

यहाँ 'द थिंक क्लब पब्लिकेशन्स' के श्री अनिल श्रीवास्तव 'मुसाफिर' से पाठकों का परिचय कराने का मन हो रहा है। अमेरिका को अपनी कर्मस्थली बनाने वाले श्रीवास्तव जी की पहचान न केवल एक कुशल अभियंता के रूप में है बल्कि एक लेखक, कवि एवं प्रकाशक के विशिष्ट उत्तरदायित्वों का भी निर्वहन आप बड़ी निष्ठां से कर रहे हैं। श्रीवास्तव जी 'द थिंक क्लब' (http://www.thethinkclub.com/) के संस्थापक हैं, जिसका उद्धेश्य लोगों में स्वतंत्र विचार को प्रोत्साहित करना है। अनिल श्रीवास्तव 'द थिंक क्लब' पत्रिका के प्रबंध सम्पादक भी हैं। आपकी लेखनी मुख्यता अंग्रेजी भाषा में चलती रही है। किन्तु अंग्रेज़ी में लगातार लिखते रहने पर भी हिन्दी और हिन्दुस्तान के प्रति आपका लगाव कम नहीं हुआ। शायद इसीलिये आप स्वान्तःसुखाय कभी-कभी हिन्दी में भी लिख लेते हैं।।

पूर्वाभास के सुधी पाठकों और विद्वान् लेखकों की ओर से सम्मानित रचनाकारों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। अनिल श्रीवास्तव जी को भी साधुवाद।

Bloomfield Hills, MI, December 28, 2012 The Think Club Publication has chosen "Left To Tell' by Immaculée Ilibagiza for its 2012 Book of the Year award.

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