भोपाल : नवगीत के प्रख्यात समालोचक एवं कवि तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वीरेंद्र आस्तिक जी ने युवा कवि इन्द्र सिंह अरसेला के गीतों को अंतरात्मा की आवाज़ बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में दंभ नहीं, बल्कि करुणा, दया, वेदना और विद्रोह के स्वर मुखरित होते हैं। उनके गीत लोकजीवन से गहरे जुड़े हैं और जनसामान्य की संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देते हैं।
मनोज जैन मधुर के संयोजकत्व में वागर्थ समूह द्वारा भोपाल स्थित दुष्यंत कुमार संग्रहालय में आयोजित समारोह में इन्द्र सिंह अरसेला के दो गीत-संग्रहों— ‘मुझको जीकर देख’ और ‘मैं चुप रहा तो’, का लोकार्पण किया गया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार मयंक श्रीवास्तव जी ने की। वीरेंद्र निर्झर आदि वक्ताओं ने अरसेला के गीतों में अभिव्यक्त संवेदना, संघर्ष और शोषित-पीड़ित जनसमुदाय की पीड़ा को रेखांकित करते हुए उनकी रचनात्मक प्रतिबद्धता की सराहना की।
समारोह में उपस्थित साहित्यकारों ने काव्य-पाठ भी किया। कार्यक्रम का संचालन अनीता तिवारी ने किया, जबकि बी.एल. गोहिया ने आभार व्यक्त किया।
‘वंदे ब्रज वसुंधरा’ की जीवन-दृष्टि को आत्मसात करने वाले डॉ. अवनीश सिंह चौहान (जन्म: 4 जून 1979) हिंदी और अंग्रेजी के द्विभाषी कवि, कथाकार, आलोचक, अनुवादक एवं संपादक हैं। वे ‘पूर्वाभास’ और ‘क्रिएशन एण्ड क्रिटिसिज्म’ के संपादक तथा आभासी दुनिया में हिंदी नवगीत के संस्थापकों में से एक हैं। वर्तमान में वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत ‘नीतिशास्त्र एवं कथाकथन शिक्षण-पद्धति’ के मास्टर ट्रेनर भी हैं।



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
आपकी प्रतिक्रियाएँ हमारा संबल: